*🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏*
*🌷卐 सत्यराम सा 卐🌷*
*साभार विद्युत संस्करण ~ Tapasvi @Ram Gopal Das*
*श्री रज्जबवाणी टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥*
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*१९. लै का अंग ~८/१०*
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*रज्जब लाहा१ लाभ ल्यौ, टूटे टोटा हानि ।*
*सावधान साधे रही, रे जीव जीवन जानि ॥८॥*
ब्रह्म में वृत्ति लीन करने से लोभ१ पर लाभ होता है और ब्रह्म से वृत्ति हटाने पर हानि पर हानि होती है । हे जीव ! ब्रह्म में वृत्ति लगाने रूप साधन को अपना जीवन जानकर सावधानी से करता रह, इसी में तेरा कल्याण है ।
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*ल्यौ सुमिरन धुनि ध्यान धर, चिवन१ नेह कर नाम ।*
*जन रज्जब जप जिकर रट, सुरति संभालैं राम ॥९॥*
ब्रह्म में वृत्ति लीन करना, स्मरण करना, नाम-ध्वनी-कीर्तन करना, ध्यान धरना, चिन्तन१ करना, प्रभु में प्रेम करना, जप करना, प्रभु की चर्चा करना, नाम रटना, प्रभु में सुरति लगाना, और राम को याद करना, ये सर्वोपयोगी साधन हैं, इन्हें करते रहना चाहिये ।
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*बन्दे को यहु बंदगी, साहिब करना याद ।*
*यह सेवा सुमिरन इहै, इहै जिकर फरियाद ॥१०॥*
भगवान को निरंतर याद रखना, यही भक्त की भक्ति है, यही सेवा है, यही स्मरण है, यही चर्चा है, यही पुकार है ।
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इति श्री रज्जब गिरार्थ प्रकाशिका सहित “१९. लय का अंग” समाप्त ॥
(क्रमशः)

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