🌷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*बखनां~वाणी, संपादक : वैद्य भजनदास स्वामी*
*टीकाकार~ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण~Tapasvi @Ram Gopal Das*
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*दादू नीका नांव है, आप कहै समझाइ ।*
*और आरम्भ सब छाड़ दे, राम नाम ल्यौ लाइ ॥*
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विश्वास ॥
को काहू कै आसिरै, काहु का व्है रहिया ।
मेरै केवल रामजी, मैं सरणाँ गहिया ॥टेक॥
को तीरथ को बरत के, को जप तप साजै ।
मेरै केवल रामजी, यहु बरत न भाजै ॥
एक मूनि गहि नागा रहै, एक दूधाधारी ।
मेरै केवल रामजी, ये पैज हमारी ॥
कोई राजा कोई परजा, कोई मेरा तेरा ।
मेरै केवल रामजी, आगै आगेरा ॥
काहु कै बल कुल जाति कौ, कोइ पढिया जोसी ।
बषनां कै केवल रामजी तूँ, करै सु होसी ॥१४२॥
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अन्य बहुत से लोग रामजी से अतिरिक्त अन्य देवी-देवताओं का आश्रय लेकर उन्हीं के भक्त बने हुए हैं किन्तु मुझ बषनां के तो परमाश्रय एक परात्पर-परब्रह्म रामजी ही हैं और मैंने उन्हीं का आश्रय ग्रहण कर रखा है । कोई तीर्थ का सेवन, कोई व्रत का, कोई जप का तथा कोई तप का अनुष्ठान करते हैं किन्तु मेरे तो केवल एक रामजी का ही व्रत = अनुष्ठान, भजन-स्मरण है जो कभी भी छूटता नहीं है ।
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कोई मौंन धारण करके नंगे रहकर साधना करते हैं, कोई अन्नादि का त्याग करके केवल दूध का ही आहार करके तपस्या करते हैं किन्तु मेरे तो केवल एक रामजी की आराधना करने की पैज = प्रतिज्ञा=प्रण है । कोई राजा की खुशामद करता है, कोई प्रजाजनों की ही सेवा-चाकरी करते हैं किन्तु मेरे तो मात्र रामजी की ही सेवा-चाकरी का काम है जो आगे से = पूर्व से मेरे पूर्वज = साधु-संत करते आ रहे हैं ।
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किसी के पास तो कुल और जाति का बल है तथा किसी के पास जोशीजी के पास पढ़ी हुई विद्या का बल है किन्तु मुझ बषनां के पास तो मात्र एक रामजी का बल है । अतः हे रामजी ! तू जो, जैसा करेगा, वैसा ही होगा और वही मुझे स्वीकार होगा । मैं तेरी शरण में जो आ पड़ा हूँ ॥१४२॥

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