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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*साभार सौजन्य ~ “श्रीमद् दादू पंथ प्रकाश”*
*श्रीमद्दादूपीठाधीश्वर(२०) श्री गोपालदासजी महाराज का संक्षिप्त जीवन दर्शन~*
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आपके उपदेशादेश उद्बोधन दीक्षा-मंत्र तथा प्रबोधन पूर्ववर्ती महान् आदर्श पूज्य आद्याचार्य परम गुरुवर्य व अनुवर्ती महान् संतों की अनुभूत वाणी श्री से अनुस्यूत सर्वग्राही व प्रवाही रहते हैं, जिन्हें प्रत्येक जिज्ञासु नर-नारी सहजता से हृदयंगम कर अपने को सर्वथा आश्वस्त हो अपने कल्याण के निमित्त प्रवृत्त होता है ।
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सहज संतमार्ग के अनुष्ठाता पूज्याचार्यश्री का सर्वथा सरल, सरस, सौम्य, निर्मल आकर्षक व प्रांजल-स्वभाव, निर्विकार निस्पृह तथा अहं से परे हरिस्मरण में निमार जीवदया व कल्याणकाम वृत्ति 'शाश्वत संत-मत~
'आपा मेटे हरि भजै, तन मन तजै विकार ।
निर्वैरी सब जीव सों, दादू यहु मत सार ।'
(श्रीदादूवाणी) चरमोदेश्य व उपास्य मंत्र है ।
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नवनियुक्त पीठाधीश्वरश्री ने अपनी भक्ति प्रतिभा समर्पण सेवा तथा गुरुभक्ति से समस्त अनुयायी-वर्ग तथा धर्मक्षेत्र में सर्वत्र चहुँमुखी ख्याति एवं कीर्ति अर्जित कर परम पावन पीठ की महिमा को विस्तीर्ण करते हए लोकार्जन व मुख्यधाम श्री दादूद्वारा के सर्वांगीण विकास तथा उत्कर्ष के साथ परमेष्ठदेवश्री की "वाणीश्री" के सिद्धान्त, संतमत तथा संन परम्परानुकूल निःश्रेयस का पथ प्रशस्त किया ।
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समारोहों-संत सम्मेलनों अन्यान्य धार्मिक अनुष्ठानों में संतमतानुसार उपदेशादेश, दीक्षा तथा संस्कारदान के द्वारा असंख्य आप प्रतिवर्ष पारम्परिक चातुर्मास यजों के माध्यम से वाणीश्री का देश में सर्वत्र प्रचार-प्रसार, दैनिक सात्संगिक जिज्ञासुजनों को आश्वस्त कर उनके कल्याण की सकामना परमप्रभु से करते रहे हैं ।
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श्रीमद् दादूधाम नरायना आश्रम का अपूर्व परिष्कार जिसमें धाम के भव्य एवं सर्व प्रसाधनयुक्त प्रासादों का निर्माण श्रद्धास्पद पुरा व पावन-प्रासादों की कमनीयता. यंत्रादि तथा विविध सन्त साहित्यिक धरोहर के सुरक्षा के साथ उनका संदर्शन, परम सुरम्य लोकोपकारी प्रयास स्थान के वैभव को चार चांद लगा देता है ।
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सम्प्रति में पिछले 17 वर्षों की अल्पावधि में पीठाधीश्वरश्री ने परमेष्टदेव श्रीमद्दादूदयाल जी महाराज, पूर्ववती समस्त पूज्याचार्यों व गुरुवर्य की कमनीय-कीर्ति के साथ समस्त दादू-समाज, पूज्य व सुसिद्ध स्तंभ-स्थानों एवं अनुयायां देश-विदेशीय भक्तों की श्रद्धा को केन्द्रित कर असंख्य नूतन अनुजनों की अपार श्रृंखला खड़ी कर विदेशों तक एतदर्थ भ्रमण कर "दादूमत" को सर्वज्ञ एवं सर्वस्पर्शिता के साथ सर्वाङ्गीणता प्रदान की है ।
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आपके प्रवचनों आशीर्वादों, कथा प्रसङ्गों तथा उपदेशादेशों में समस्त निर्गुणी संत-श्रेणी के सन्तों की अनुभव वाणी, झंकृत होती हैं । संतवर्य सद्गुरु श्री दादूदयाल, सन्त कबीर, गुरुनानक, रैदास, नामदेव, दारिया प्रभृत्ति संतों की परावाणीश्री, सन्त रज्जब, विरही बखना, संत वाजिंद, संतकवि सुंदरदास, श्री जगजीवनदास आदि पंथीय अनुवर्ती संत-शिष्यों के हृदयस्पर्शी संदेश तथा आद्यन्त सकल संतों व भगवद् भक्तों के जीवन-दृष्टांत व वृत्तों से परिपूर्ण आख्यानों से जिज्ञासुजन के हद्देश में सहजभावेन परब्रह्म की अनुभूति कर, उन्हें कृत-कृत्य कर देते हैं ।

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