🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷*卐 श्री दादूदयालवे नम: 卐*🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
*समर्थ सो सेरी समझाइनैं, कर अणकर्ता होइ ।*
*घट घट व्यापक पूर सब, रहै निरंतर सोइ ॥*
.
१२ वें चेतनदेवजी अच्छे विद्वान् और विरक्त थे । इन्होंने दादूजी का जीवन चरित्र भी लिखा है । उसमें ५२ विश्राम हैं । इन्होंने जीवितावस्था में ही गद्दी त्याग दी थी । ये एकान्त में रहकर भगवद् भजन ही करते थे । शांत स्वभाव के अच्छे संत थे । १४ वें भजनदासजी भी अच्छे विद्ववान्, वैद्य व संगीतज्ञ थे । इनके पश्चात् कोई महन्त नहीं है ।
.
१५ लालदासजी - केवलरामजी के पाटवी शिष्य रामदासजी, उनके शिष्य हरिभक्तजी उनके हरिदासजी, उनके लालदासजी हुये हैं । इस प्रकार दादूजी से ७ वें लालदासजी हैं । लालदासजी महान् संत हुये हैं । ये लालदासजी मलाणा वालों के नाम से जोधपुर के आस पास प्रसिद्ध हैं । इनका स्थान मलाणा धाम नाम से पुकारा जाता है ।
.
आपके स्थान में एक लाल पत्थर की सवामण की विशाल कुंडी है । लालदासजी के नाम का एक नारेल चढ़ाकर वहां के विशाल जल के कुंड में कुंडी को छोड़ देते हैं । वह जल पर तैरती रहती है । तैरते समय दो इंच पानी के बाहर रहती है, शेष पानी में डूबी रहती है । कुंडी में पानी नहीं भरता है । कहा भी है~
भक्त नाम से पाठ पर, पत्थर भी तिर जाय ।
महलाणे कुंडी तिरे, बहुते लोग सुनाय ॥दृ. त. ६॥
.
स्थान में लालदासजी की खड़ाऊ हैं, उनको धोकर पिलाने से हिड़के(पागल) कुत्ते का विष उतरता है । इसके लिये आस पास के लोग वहां ही जाते हैं । अन्य इलाज नहीं कराते हैं । कहा भी है~
संतन के तन संग से जड़ में भी बल आत ।
लालदास की पादुका, अब भी रोग गमात ॥१९३॥दृ. त. ११॥
.
लालदासजी को जोधपुर नरेश विजयसिंहजी ने कहा~ कूंडी तैरती है, तब तो शिला भी तैरनी चाहिये । तब लालदासजी जोधपुर के गुलाब-सागर में सागर के पास पड़ा एक पत्थर का स्तंभ तिरा दिया था । लालदास जी के स्थान मलाणा में अब भी प्रति मास की पूर्णिमा को जागरण सत्संग होता है ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें