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🌷*卐 श्री दादूदयालवे नम: 卐*🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
*दादू राम रसायन भर धर्या, साधुन शब्द मंझार ।*
*कोई पारखि पीवै प्रीति सौं, समझै शब्द विचार ॥*
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लालदासजी वि.सं. १८३० के लगभग जोधपुर में ही ब्रह्मलीन हुये थे । उनकी समाधि गवा की डूंगरी पर तेजानन्दजी की समाधि के पास ही है ।
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लालदास जी मलाणा की वाणी~
वि.सं. १६३९ की लिखी हुई लालदासजी के अस्थल जोधपुर नागौरी गेट के वर्तमान महन्त रामनारायणजी के पास बड़ी पुस्तक में निम्न वाणी देखने में आई, साखी ७६ । अरिल ३ । पद ७ देखने में आये ।
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इनके लघु ग्रंथ~
१~ ब्रह्म स्त्रोत युग्म, इसमें १८ पद्य हैं आदि में एक दोहा और अंत में एक छप्पय है । शेष सब मोतिदाम छंद है । उदाहरण~ मोतीराम-
पुरातन आदि अनंत अपार ।
अखंड अडंड अतीत अधार ॥
अछेद अभेद अलेख अन्नवे ।
नमो परब्रह्म निरंजन देव ॥१॥
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२~ "नाम माला" इनका यह प्रसिद्ध है । इसमें दादूजी के १५२ शिष्यों के नाम तथा मुख्य २ चरित्र दोहों में हैं । चरित्र किसी का एक किसी का दो और किसी का तीन दोहों में दिया है ।
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३~ एक "भयानक चितावनी" ग्रंथ भी लालदासजी का मिलता है और भी कोई रचना इनकी होनी चाहिये । कारण, इनकी रचना से ये अच्छे कवि ज्ञात होते हैं । अतः अन्य रचना भी होनी चाहिये । इनकी वाणी के उदाहरण भी देखिये~
साखी~
'तन त्यागी तरकां करे, मन माया के मांहिं ।
यह लोग दिखावा लालदास, सो साहिब माने नांहिं ॥१॥
अरिल~
"सूता सारी रात लगा नहिं पीव से,
संकट पड़सी सोच बनेगी जीव से ।
स्वाद बाद से श्वास गमाया बादरे,
परिहां लाल कहै समझाय सु अब तो जागरे ।
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पद~
राम भक्ति नहिं जानी प्राणी, सोवत रैनि विहाणी ॥टेक॥
जब लग सूता तब लग देखे, जागत किनहुन मानी ।
यह संसार इसो रे प्राणी, ज्यूं अंजली का पानी ॥१॥
यह संसार इसा रे प्राणी, ज्यूं तरवर की छाया ।
धन जीवन है धूम गृह ज्यों, ज्यों सपने की माया ॥२॥
हस्ती घोड़ा देश परगना, आणि मिले रजधानी ।
मेरी मेरी कर नर फूले, हो गई झूठ निधानी ॥३॥
झूठ सांच जिन कीन्ह निबेड़ा गुरु गम ज्ञान विचारी ।
लाल कहै जन कहि कहि हारे, ममता किनहु न मारी ॥४॥
(क्रमशः)

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