*🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏*
*🌷卐 सत्यराम सा 卐🌷*
*साभार विद्युत संस्करण ~ Tapasvi @Ram Gopal Das*
*श्री रज्जबवाणी टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥*
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*२६. भजन प्रताप का अंग ~२५/२८*
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*रज्जब अज्जब काम है, जे सुमिरे कोउ जंत१ ।*
*सकल लोक शिर कीजिये, उर सेवक भगवंत ॥२५॥*
परमात्मा का स्मरण अदभुत कार्य है यदि कोई जीव१ निरंतर अपने हृदय में स्मरण करता है, तो उस भक्त को भगवान् संपूर्ण लोकों के शिरोमणि अपने स्वरूपमय ही कर लेता है ।
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*सब विधि नर के काम को, नाम निरंजन सत्ति१ ।*
*जन रज्जब जो ज्यों भजे, ताकि मोटी मत्ति२ ॥२६॥*
मनुष्य की कार्य सिद्धि के लिये सब प्रकार निरंजन राम का नाम ही सच्चा१ हेतु है, जो मनुष्य जैसे तैसे भी निरंजन का भजन करता है, तो उसकी बुद्धि२ विशाल ही कही जाती है ।
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*पति परमेश्वर वीरज नाम, अबला आतम रति१ रुचि ठाम ।*
*मेला या सम कोई नाँहिं, विगति२ बाल ब्रह्म उपजे माँहिं ॥२७॥*
परमेश्वर पति है, नाम वीर्य है, आत्मा नारी है, आत्मा का परमात्मा से प्रेम ही काम-क्रीड़ा१ के स्थानापन्न है, उक्त मिलन के समान संसार में कोई भी मिलन नहीं हो सकता है, इस मिलन से ही हृदय में मुक्ति-प्रदाता२ ब्रह्म-ज्ञान रूप बालक उत्पन्न होता है ।
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*नाम निधारे१ धार बहु, काटे साँकल कोङि ।*
*रज्जब हद हथियार यहु, हथियारहु की वोङि२ ॥२८॥*
निरंजन नाम अज्ञानियों को धाररहित१ भासता है, किन्तु उसके बहुत तीक्ष्ण धार है, तभी तो ज्ञान द्वारा कोटि कर्म रूप जंजीरों को काट डालता है, इस नाम रूप हथियार ने तो हद्द कर दी है, यह हथियारों की सीमा२ का हथियार है, अर्थात सर्व श्रेष्ठ हथियार है ।
(क्रमशः)

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