बुधवार, 12 अगस्त 2026

*२४. नाम महिमा का अंग ~१३/१६*

*🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏*
*🌷卐 सत्यराम सा 卐🌷*
*साभार विद्युत संस्करण ~ Tapasvi @Ram Gopal Das*
*श्री रज्जबवाणी टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥*
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*२४. नाम महिमा का अंग ~१३/१६*
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*नर नारायण सौं बड़ा, प्रकट नाम परकास ।*
*दोन्यों आगे नाम के, सेवक स्वामी दास ॥१३॥*
नाम चिन्तन द्वारा ब्रह्मज्ञान रूप प्रकाश प्रकट होकर नर नारायण(विष्णु) से भी बड़ा हो जाता है, अर्थात ब्रह्मरूप हो जाता है । नाम स्मरण के बल से ही सेवक नारायण रूप स्वामी के पास जाता है और नारायण रूप स्वामी सेवक के पास आता है ।
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*रज्जब नाम नराधिपति, अंग१ अनन्त उमराव२ ।*
*दल बल महिमा क्या कहूँ, देख्या विपुल३ बणाव४ ॥१४॥*
नाम तो राजा के समान है और अनन्त साधन१ है वे सरदारों२ के समान हैं । इनके समूह और बल की महिमा में क्या कह सकता३ हूँ ? किन्तु मैनें देखा है, मोह दल को जीतने के लिये, इनकी सजावट महान्४ है ।
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*युग युग राखी नाम की, संकट करी सँभाल ।*
*रज्जब महिमा क्या कहैं, वेद न जाने व्याल१ ॥१५॥*
परमात्मा ने नाम की महिमा प्रति युग में अखंड रक्खी है, नाम चिन्तन करने वालों की दु:ख के समय सहायता की है नाम की महिमा हम तो क्या कह सकते हैं, वेद तथा शेष१ जी भी पूर्ण रूप से नहीं जानते ।
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*रज्जब महिमा नाम की, नर पै कही न जाय ।*
*जाके वश दोउ देखिये, कुदरत सहिय खुदाय ॥१६॥*
जिस नाम के वश में माया और माया के स्वामी ईश्वर दोनों हैं, उस नाम की महिमा मनुष्य से कैसे कही जा सकती है ।
(क्रमशः)

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