गुरुवार, 3 सितंबर 2026

*कुशालीरामजी*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷*卐 श्री दादूदयालवे नम: 卐*🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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*अविनाशी साहिब सत्य है, जे उपजै विनशै नांहि ।*
*जेता कहिये काल मुख, सो साहिब किस मांहि ॥*
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१~ *कुशालीरामजी* को जोधपुर नरेश मानसिंह ने नीमोला ग्राम की ४५ बीघा भूमि समर्पण की थी वि. सं. १८६६ में । ठाकुर मालुम सिंह ने स्थान की सेवा के लिये कुशालीरामजी को वि. सं. १८६० व १८६९ में दो बार भूमि दी थी और चार आने प्रति-दिन के हिसाब से रैंण के जागीरदार स्थान सेवा दादूजी की सेवार्थ देते थे । प्रति गाड़ी अन्न की जो बिक्री के लिये आती थी उससे ६ छटाँक अन्न दादू द्वारे को दिया जाता था । और प्रति हलवाला प्रतिवर्ष एक धड़ी अन्न की सेवा दादूद्वारे की करता था ।
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७~ *नानकदासजी* वि. सं. २००१ मार्गशीर्ष पूर्णिमा से स्थान की सेवा कर रहे हैं । चार ग्रामों की~ १- बछवास, २- नीमोला, ३- खारिया, ४- जाबली की तथा रैंण के जागीरदार की दी हुई भूमि लोगों ने दबाली थी । नानकदासजी ने अति परिचय कर उक्त पांचों ही ग्रामों की भूमि को पुनः स्थान के नीचे लगाने का श्लाघनीय कार्य किया था । रैंण की भूमि रैंण के जागीरदार ने, खारिया की खारिये के दोनों जागीरदारों ने, जाबली की भूमि जोधपुर नरेश ने दी थी । पालीवाल भक्त पाली से संतों को यहां लाये थे और अभी तक पालीवाल भक्त स्थान की सेवा करते हैं ।
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*कुशालीरामजी* ने जोधपुर नरेश के सिंगी मंत्री का अदीठ मिटाया था इससे जोधपुर नरेश ने भूमि दी थी और रैंण का स्थान भी बनवाया था । रैंण स्थान की शाखा रूप स्थान~ १~ बछवास, २~ नीमोला, ३~खारिया, ४~जावली, ५~डावराणी है । नानकदासजी ने स्टेशन व कुचेरा रोड़ पर स्कूल के पास धर्मार्थ प्याऊ भी बनाई है और उसे सदा चलाते हैं । अन्यान्य धर्म कार्यों में व साधु सेवा में अग्रसर रहते हैं । अच्छे संत हैं ।
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*बूड़सू स्थान* ~ आचार्य चैनरामजी महाराज की शिष्य परंपरा बूड़सू(मारवाड़) अच्छा स्थान था । किन्तु न तो इसकी प्रणाली ज्ञात हो सकी है तथा यह स्थान भी समाप्त हो गया है ।
*खन्डेल स्थान* ~ आचार्य चैनरामजी की शिष्य परंपरा का स्थान खंडेल था । यह स्थान फुलेरा की शाखा रूप था । इसके अधिष्ठाता धनीरामजी थे । वर्तमान में कौन है कोई है या नहीं है निश्चय नहीं हो सका ।
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*तिलोनिया स्थान* ~ तिलोनिया स्थान नारायणा चैनरामजी महाराज के शिष्य परंपरा के स्थान का शाखा रूप था इसकी पूर्ण प्रणाली अज्ञात है । जो ज्ञात हो सकी है सो यह है १~ मगनीरामजी २~ सम्पतरामजी ३~ लक्ष्मणदासजी । आगे समाप्त है ।
*मन्डावरिया स्थान* ~ यह स्थान तिलोनिया स्टेशन से पश्चिम की ओर है किन्तु अब उसमें साधु नहीं है । राजकीय स्कूल है । इसमें पहले लक्ष्मणदासजी वैद्य थे । *झीटिया स्थान* ~ झिटिया मारवाड़ में है । यहां का स्थान आचार्य चैनरामजी महाराज की शिष्य परंपरा का ही था । पहले इसमें चन्दनदासजी थे । अब कोई नहीं है ।
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*राजगढ़ का स्थान* ~ राजगढ़(अलवर) के स्थान की प्रणाली ज्ञात नहीं हो सकी । अब स्थान तो है किन्तु साधु नहीं है । यह स्थान आचार्य निर्भयरामजी महाराज के समय में बना था । यह प्रतिष्ठित स्थान था । राजगढ़ दादूद्वारे के भंडारी सदाव्रत का कार्य करने वाले भंडारी इसी स्थान के उत्तराधिकारी थे । अलवर राज्य तक इनकी पहुँच थी । अब स्थान रिक्त है ।
(क्रमशः)

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