रविवार, 27 अक्टूबर 2013

= जीवित मृतक का अंग २३ =(४७/४८)


॥ दादूराम सत्यराम ॥
*"श्री दादूदयाल वाणी(आत्म-दर्शन)"*
टीका ~ महामण्डलेश्वर ब्रह्मनिष्ठ पंडित श्री स्वामी भूरादास जी
साभार विद्युत संस्करण ~ गुरुवर्य महामंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमाराम जी महाराज
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*जीवित मृतक का अंग २३*
*दादू जे तूं मोटा मीर है, सब जीवों में जीव ।*
*आपा देख न भूलिये, खरा दुहेला पीव ॥४७॥*
टीका ~ हे जिज्ञासुओं ! जो तूं ‘मोटी मीर’ कहिये सर्व प्राणियों में विवेकशील महापुरुष है तो, संसार अपनी मान प्रतिष्ठा को देखकर, सत्यस्वरूप परमेश्‍वर को, दुहेला कहिए, अति कठिनाई से प्राप्त होने वाले, मुखप्रीति का विषय पीव, परमेश्‍वर को नहीं भूल जाना ॥४७॥
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*आपा मेट समाइ रहु, दूजा धंधा बाद ।*
*दादू काहे पच मरै, सहजैं सुमिरण साध ॥४८॥*
टीका ~ हे जिज्ञासुओं ! अपने स्थूल शरीर के आपा को, कहिये अहंकार को त्याग करके, आत्म परायण होकर, निर्द्वन्द्व निष्काम भाव से, हरि का नाम स्मरण रूपी साधन करिये । और सकाम साधन सब वृथा हैं ॥४८॥
कबीर मृतक ह्वै रहै, तजे जगत की आस । 
तब साहिब सेवा करै, मत दुख पावै दास ॥
(क्रमशः)

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