#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
Tejomayananda
Om
In thy lotus feet
with love.....may every breath be in thy memory....
Every Karma be in thy Glory....
The whole Universe is spreading thy beauty..........
Naman to thee in thy lotus feet............
Om
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१८२. हितोपदेश । (श्री दादूवाणी)
हरि के चरण पकर मन मेरा, यहु अविनाशी घर तेरा ॥ टेक ॥
जब चरण कमल रज पावै, तब काल व्याल बौरावै ।
तब त्रिविध ताप तन नाशै, तब सुख की राशि विलासै ॥ १ ॥
जब चरण कमल चित लागै, तब माथै मीच न जागै ।
तब जनम जरा सब क्षीना, तब पद पावन उर लीना ॥ २ ॥
जब चरण कमल रस पीवै, तब माया न व्यापै जीवै ।
तब भरम करम भय भाजै, तब तीनों लोक विराजै ॥ ३ ॥
जब चरण कमल रुचि तेरी, तब चार पदारथ चेरी ।
तब दादू और न बांछै, जब मन लागै सांचै ॥ ४ ॥
टीका ~ ब्रह्मऋषि सतगुरुदेव इसमें हितोपदेश कर रहे हैं कि हे हमारे मन ! अब तूँ पापों के हर्ता हरि के चरणों की शरण ग्रहण कर । वे हरि अविनाशी ही तेरा वास्तविक घर है । जब हरि के प्यारे संतों के चरणों की रज ग्रहण करेगा, तब फिर तेरा काल रूपी सर्प बौखला जायेगा । और तीन प्रकार की जो तन की ताप हैं, वे भी तेरी नष्ट हो जायेंगी । तथा सम्पूर्ण सुख की ‘राशि’ हरि की भक्ति करके तूँ आनन्द को प्राप्त होगा । जब हृदय कमल में हरि के चरणारविन्द में तेरा चित्त लगेगा, तब तेरे सिर पर मौत नहीं आवेगी और जन्म - मृत्यु, जर्जर अवस्था भी क्षीण हो जायेगी । जब पवित्र प्रभु चरणों में तू लीन रहेगा और कमल चरणों की भक्ति रूप अमृत - रस को पीवेगा, तब मेरे जीव पर माया और माया का कार्य रूप धर्म व्याप्त नहीं होगा । तब तेरा सम्पूर्ण कर्म - भय दूर हो जायेगा । तब तीनों लोकों में व्याप्त प्रभु का तुझे साक्षात्कार होने लगेगा । जब चैतन्य स्वरूप के तेज - पुंज रूपी चरणों में, तेरी प्रीति उत्पन्न होगी, तब चार पदार्थ कहिए अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष ये तेरे सामने सेवक बनकर रहेंगे । परन्तु सच्चे परमेश्वर के निष्कामी भक्त, उन में से किसी की भी इच्छा नहीं रखते । अपने मन को सत्य स्वरूप परमेश्वर में लगाकर मस्त रहते हैं ।

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