🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#श्रीदादूवाणी०प्रवचनपद्धति* 🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
.
*चेतावनी का अंग ९/२*
.
*दादू जे साहिब को भावे नहीं, सो हम तैं जानि होय ।*
*सद्गुरु लाजे आपना, साध न माने कोइ ॥२॥*
दृष्टांत -
इक बंदे किय तीन सौ, ग्रन्थ राम गुण गाथ ।
परा शब्द ऐसा भया, इनतैं मोहि न पात ॥१॥
एक भक्त ने राम गुण गान रूप कथाओं के तीन सौ ग्रन्थों की रचना की थी । अन्त में पराशब्द(ब्रह्मवाणी) उसे सुनाई दी कि इन गाथाओं से मेरी प्राप्ति नहीं होती है । मेरी प्राप्ति तो मेरे में परम प्रेम करने से अथवा अद्वैत निष्ठा से ही होती है । यह उक्त २ की साखी में कहा है - कि जो प्रभु को प्रिय नहीं हो, वह हमसे होना ही नहीं चाहिये ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें