शनिवार, 26 अक्टूबर 2013

= ३४ =


#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
कोरा कलश अवाह का, ऊपरि चित्र अनेक ।
क्या कीजे दादू वस्तु बिन, ऐसे नाना भेष ॥ 
बाहर दादू भेष बिन, भीतर वस्तु अगाध ।
सो ले हिरदै राखिये, दादू सन्मुख साध ॥ 
दादू कनक कलश विष सौं भर्या, सो आवै किस काम ।
सो धन कूटा चाम का, जामें अमृत राम ॥ 
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साभार ~ Ganga [ माँ गंगा ] 
~ गुरु नानक देव जी कहते हैं ...
अगर तेरा घर मोतियों का बना हो और उस पर कीमती रत्न जड़े हों | उस पर चन्दन, केसर और कस्तूरी के लेप चढ़े हों जिसके वजह से वो हर समय महकता हो पर अगर तेरे ह्रदय में राम-नाम नहीं है तो ये सब बेकार है | राम नाम के बिना आत्मा अतृप्त और प्यासी है और गुरु के अनुसार उसके बिना कोई स्थान आत्मा के ठहरने के लिए नहीं है | अगर तेरे महल का फर्श हीरे और लाल से जड़ा हुआ हो और बिस्तर लाल से जडित हो | 
ज़न्नत की सुन्दर अप्सराएं तेरे चारों तरफ अपने सुन्दर चेहरे से तेरी तरफ प्रेम से निहारती हों, पर फिर भी तेरा जन्म बेकार ही अगर तेरे अन्दर राम-नाम का प्रकाश नहीं है | अगर तुन बहुत बड़े सिद्ध पुरुष बन जाओ और अनेक तरह की सिद्धि और चमत्कार के मालिक बन जाओ जैसे कि चमत्कार दिखाना, धन को प्रकट करना, अदृशय हो जाना आदि, जिसके कारण समाज में वाहवाही और इज्ज़त हो जाये. पर बिना हरी-नाम के सब अधूरी है | अगर तुम बहुत बड़े बादशाह हो जाओ, विशाल सेना को चलाते हो और बड़े सिंहासन पर बैठे हो पर राम-नाम के बिना सब बेकार हैं |

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