शनिवार, 28 दिसंबर 2013

दादू - औषधि मूली कु़छ नहीं ८/६६

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साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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*निष्कामी पतिव्रता का अंग ८/६३*
*दादू - औषधि मूली कु़छ नहीं, ये सब झूठी बात ।*
*जे औषधि ही जीविये, तो काहे को मर जात ॥६६॥* 
दृष्टांत - 
बादशाह मरती समय, सब छाढ़े किये ल्याय । 
वैद्य शूर धन लोग कुल, सबहि देखते जाय ॥१९॥ 
एक दिन एक बादशाह के पास एक संत पहुँच गये और उसे कहा - ईश्वर का स्मरण किया करो । अन्त समय में वे ही काम देंगे । बादशाह ने कहा - अन्त समय में काम देने वाले सब साधन मेरे पास हैं, मुझे ईश्वर स्मरण की क्या आवश्यकता है ? रोग निवृत्त करने वाले चिकित्सक हैं । शत्रुओं से युद्ध करने वाली सेना है । सब विपत्ति मिटाने वाला धन है । साथ में परिवार है किन्तु उस बादशाह के मृत्यु का समय आया तब उक्त सब में से कोई भी उसे नहीं बचा सका । इसी से उक्त ६६ की साखी में कहा है - औषधि आदि कोई भी मृत्यु से नहीं बचा सके उनके भरोसे पर रहने की बात मिथ्या ही है ।
(क्रमशः)

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