*श्री सन्त-गुण-सागरामृत श्री दादूराम कथा अतिपावन गंगा* ~ स्वामी माधवदास जी कृत श्री दादूदयालु जी महाराज का प्राकट्य लीला चरित्र ~ संपादक-प्रकाशक : गुरुवर्य महन्त महामण्डलेश्वर संत स्वामी क्षमाराम जी ~
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*(“सप्तम - तरंग” ३८)*
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*गरीबदास, मसकीनदास, राम और श्याम बाईया,*
*वरदान स्वरूप प्रगट हुये ।*
सोरठा
सम्वत् सोलह सौ बत्तीस, गरीबदास जन अवतरे ।
मस्कीना चोतीस, बाई द्वय छत्तीस सम ॥३७॥
श्री दादू भगवान, देव पुष्प द्विज - तिय दियो ।
सो पायो वरदान, द्विज - सेवक हर्षित भयो ॥३८॥
वि. सम्वत् १६३२ में गरीबदास अवतरे, और १६३४ में मसकीनदास । फिर १६३६ में दोनों कन्यायें(रामाकुमारी, और श्यामा कुमारी) ने जन्म लिया । भगवत् - स्वरूप श्री दादूजी द्वारा देव कुसुम(लवंग) का प्रसाद व वरदान पाकर द्विज सेवक दामोदर उमा अत्यन्त हर्षित रहने लगे ॥३८॥
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॥ इति माधवदास विरचिते श्री संतगुण सागरामृत साँभर लीला वरणनो ॥ इति सप्तम तरंग सम्पूर्ण ॥७॥
(क्रमशः)

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