#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
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*सवैया ग्रन्थ(सुन्दर विलास)*
साभार ~ @महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य - श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व
राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
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*लोह कौं ज्यौं पारस पखान हू पलटि लेत,*
*कंचन छुवत होई जग मैं प्रवांनिये ।*
*द्रुम कौ ज्यौं चंदन हू पलटि लगाइ बास,*
*आपु कै समांन तां मैं शीतलता आंनिये ॥*
*कीट कौ ज्यौं भृंग हू पलटि कै करत भृंग,*
*सोई उड़ि जाइ ताकौ अचिरज मांनिये ।*
*सुन्दर कहत यह सगरै प्रसिद्ध बात,*
*सद्यः शिष्य पलटै सु सत्य गुरु जांनिये ॥१४॥*
शिष्य को तत्व विचारक बनाने वाला ही गुरु : ये बातें जगत् में प्रसिद्ध हैं कि -
१. पारस पत्थर साधारण लोह को भी, स्पर्श करते ही, सुवर्ण के रूप में परिवर्तन कर देता है ।
२. चन्दन वृक्ष अपने पास खड़े वृक्षों में भी अपने ही सामान सुगन्ध तथा शीतलता उत्पन्न कर देता है ।
३. इसी तरह भृंग(भवँरा) साधारण कीट को अपनी विशेष ध्वनि, निरन्तर कुछ समय तक सुना कर, अपने सामान भृंग बना लेता है तथा वह उड़ने लगता है - इसे देखकर लोग आश्चर्य करते हैं ।
श्री सुन्दरदास जी कहते हैं - इसी तरह यह बात सर्वजनप्रसिद्ध है कि कोई सच्चा गुरु शिष्य की सांसारिक बुद्धि को भी तत्काल ब्रह्मविचार में लगा देता है । हम तो ऐसे महापुरुष को ही अपना 'गुरु' मानते हैं ॥१४॥
(क्रमशः)

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