शुक्रवार, 19 सितंबर 2014

**सीकरी प्रसंग २९ वां दिन**

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साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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*सीकरी प्रसंग २९ वां दिन -*
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२९ वें दिन अकबर ने पू़छा हिन्दू लोग श्राद्ध से मुक्ति मानते हैं आपका इस विषय में क्या मत है ? दादूजी ने कहा मेरा मत तुम सुनो -
*दादू छूटे जीवता, मूवां छूटे नांहि ।*
*मूवां पीछे छूटिये, तो सब आये उस मांहिं ॥३९॥*
(सजीवन अंग २६)
मूवां पीछे मुक्ति बतावे, मूवां पीछे मेला ।
मूवां पीछे अमर अभय पद, दादू भूले गैला ॥४०॥
(सजीवन अंग २६)
जीवित मेला ना भया, जीवित परस न होय ।
जीवित जगपति ना मिले, दादू बूड़े सोय ॥३५॥
पिंड मुक्ति सब को करे, प्राण मुक्ति नहिं होय ।
प्राण मुक्ति सद्गुरु करे, दादू विरला कोय ॥२१॥
(विचार अंग १८)
इत्यादिक साखियों द्वारा श्राद्ध संबंधी अपने विचार कहे फिर दादूजी मौन हो गये । सत्संग का समय समाप्त हो जाने से अकबर आदि श्रोतागण भी अपने अपने स्थानों को चले गये ।

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