🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#श्रीदादूवाणी०प्रवचनपद्धति* 🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
.
*सीकरी प्रसंग १४ वां दिन*
.
१४ वें दिन अकबर बादशाह ने पू़छा - निर्गुणाराम और अवतारों में क्या भेद है ? यह भी बताइये । दादूजी ने कहा - निर्गुणराम केवल सत्ता मात्र देता है और अवतार उत्पत्ति आदि कार्य करते हैं जैसे -
*राजस कर उत्पत्ति करे, सात्विक कर प्रतिपाल ।*
*तामस कर परलै करे, निर्गुण कौतुकहार ॥५॥*
(साक्षी भू. अं. ३५)
.
फिर ५४ के पद से राम का स्वरूप इस प्रकार बताया -
५४. स्वरूप गति हैरान । वर्ण भिन्न ताल
ऐसा राम हमारे आवै, वार पार कोई अन्त न पावै ॥टेक॥
हलका भारी कह्या न जाइ, मोल माप नहीं रह्या समाइ ॥१॥
कीमत लेखा नहीं परिमाण, सब पच हारे साधु सुजाण ॥२॥
आगो पीछो परिमित नांहिं, केते पारिख आवहिं जाहिं ॥३॥
आदि अन्त मधि कहै न कोइ, दादू देखै अचरज होइ ॥४॥
.
फिर ये साखियां भी कही -
जामे मरे सु जीव है, रमता राम न होय ।
जामण मरण तैं रहित है, मेरा साहिब सोय ॥१२॥
उठै न बैठे एक रस, जागे सोवे नांहिं ।
मरे न जीवे जगद्गुरु, सब उपज खपे उस मांहिं ॥१३॥
(पीव पह. अंग २०)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें