#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
आत्म मांही राम है, पूजा ताकी होइ ।
सेवा वंदन आरती, साध करैं सब कोइ ॥
परिचै सेवा आरती, परिचै भोग लगाइ ।
दादू उस प्रसाद की, महिमा कही न जाइ ॥
मांहि निरंजन देव है, मांहि सेवा होइ ।
मांहि उतारै आरती, दादू सेवक सोइ ॥
दादू मांहि कीजै आरती, मांहि पूजा होइ ।
मांहि सतगुरू सेविये, बूझै विरला कोइ ॥

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