दादू लाइक हम नहीं, हरि के दर्शन जोग ।
बिन देखे मर जाहिंगे, पीव के विरह वियोग ॥
दादू दर्शन की रली, हम को बहुत अपार ।
क्या जाणूं कबही मिले, मेरा प्राण आधार ॥
पासैं बैठा सब सुणै, हमकों जवाब न देइ ।
दादू तेरे सिर चढै, जीव हमारा लेइ ॥
बिन देखे मर जाहिंगे, पीव के विरह वियोग ॥
दादू दर्शन की रली, हम को बहुत अपार ।
क्या जाणूं कबही मिले, मेरा प्राण आधार ॥
पासैं बैठा सब सुणै, हमकों जवाब न देइ ।
दादू तेरे सिर चढै, जीव हमारा लेइ ॥

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