शनिवार, 20 सितंबर 2014

= १०९ =

卐 सत्यराम सा 卐 
दादू सुध बुध आत्मा, सतगुरु परसे आइ । 
दादू भृंगी कीट ज्यों, देखत ही ह्वै जाइ ॥ 
दादू भृंगी कीट ज्यूं, सतगुरु सेती होइ । 
आप सरीखे कर लिये, दूजा नाहीं कोइ ॥ 
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आभार : Inder Singh
एक शहर में तीन सखियाँ रहती थीं । बचपन से एक साथ खेलती कूदती और पढ़ती लिखती बड़ी होई । तीनों का आपस में बहुत प्रेम था । उन तीनों में एक ही समानता थी कि तीनों को प्रभु प्रेम और प्रभु प्राप्ति की लगन थी ।
उन्होंने सुन रखा था कि गुरु के बिना प्रभु की प्राप्ति कठिन है । उन्ही के शहर में एक गुरुदेव की कुटिया थी । पर वहां यह समस्या थी कि वे किसी नारी को शिष्या नहीं बनाते थे । उन्हें किसी अन्य गुरु की जानकारी ही न थी । इस लिए उन तीनों ने दृढ़ संकल्प किया कि यहीं चलते हैं और उन्ही की कुटिया के बाहर जाकर बैठते हैं ।
वे तीनों वहां पहुँच गयी, वहीँ खड़े एक सेवादार से उन्हों ने अपनी इच्छा जाहिर की । सेवादार ने बताया कि गुरुदेव किसी नारी को दीक्षा नहीं देते इसलिए आपको वापिस चले जाना चाहिये । तीनों सखियाँ तो सोच कर आई थीं कि बिना दीक्षा वापिस नहीं जाना ।
उन तीनों ने सेवादार से कहा कि, "हम तो यहीं बैठी हैं, अगर गुरुदेव कबूल न करेंगे तो कोई बात नहीं, हम यहीं भूख और प्यास सहती हुई अपने प्राण त्याग देंगी ।" और वे तीनों वहीँ बैठ गयी ।
अन्दर गुरुदेव तक खबर पहुंचा दी गयी । पर गुरुदेव ने साफ़ इनकार कर दिया । एक दिन बीता, दो दिन बीते पर उन तीनों पर भूख और प्यास से मृत्यु का कोई डर का लक्ष्ण नही उभरा । हर तरफ चिंता की लहरें दौड़ने लगी 
गरुदेव भी परेशान से दिखने लगे ।
गुरुदेव ने एक सेवादार को भेजा । सेवादार ने आकर सूचना दी, "गुरुदेव ने आपको एक एक कर अंदर बुलाया है ।" उन्ही में से एक सखी को अंदर ले जाया गया । 
गुरुदेव ने धरना देने का कारण पुछा, पहली सखी का जवाब था, "हमे प्रभु के घर में कबूल होना है । जो कि गुरु के बिना असंभव है ।" 
गुरुदेव - एक समस्या है, अगर आप उस समस्या का समाधान कर देंगी तो आपको गुरुदीक्षा मिल जाएगी, अन्यथा आपको अगले जन्म तक इँतजार करना पड़ेगा ।
पहले वाली ने समस्या पूछी । गुरुदेव ने समस्या बताई, मान लो कि आप एक समुद्री जहाज़ में हो उस में आप अकेली हो और बाकी सभी पुरुष हैं । अगर वहां सबकी नियत ख़राब हो जाये तो अपना बचाव कैसे करोगी ? वह महिला एक वेश्या थी, उसका जवाब था कि कोई समस्या नही होगी समाधान तो तभी निकलना होगा अगर समस्या हो तो ।
गुरुदेव ने उसे एक तरफ बैठने का इशारा किया और वह बैठ गयी । अब दूसरी को अन्दर बुलाया गया, उसे समस्या बताई गयी, वह कुछ ज्यादा ही धार्मिक विचारों वाली थी । उसने जवाब दिया, "किसी के हाथ आने से पहले ही समुद्र में कूद आत्म हत्या कर लूंगी ।" गुरुदेव ने उसे भी एक तरफ बैठने का इशारा कर दिया ।
अब तीसरी को अंदर बुलाया गया और वही समस्या उसे भी बताई गयी । अब तीसरी ने दोनों हाथ जोड़े, आँखों में आंसू भर जवाब दिया, "गुरुदेव मेरे पास कोई समाधान नहीं है । मुझे तो आप जैसा कहेंगे, मैं वैसे ही कर लूंगी" । 
इस जवाब से संतुष्ट होकर गुरुदेव ने उसे कबूल कर दीक्षा प्रदान कर दी ।

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