शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

#daduji 

सीकरी प्रसंग २० वां दिन ~

२० वें दिन अकबर बादशाह ने दादूजी से पू़छा - आपकी जाति क्या है ? तब दादूजी ने कहा- आप को जाति पू़छने की क्या आवश्यकता है? संतों से उपदेश लेना है फिर भी बोले -
दादू गऊ बच़्छ का ज्ञान गह, दूध रहे ल्यो लांहि ।
सींग पू़छ पग परिहरे, अस्थन लागे धाहिं ॥ १५ ॥
काम गाय के दूध से, हाड चाम से नांहिं ।
इहिं विधि अमृत पीजिये, साधन के मुख मांहिं ॥ १६ ॥
फिर भी आप पू़छना ही चाहते है जाति संबंधी मेरे विचार ये है-
करणी ऊपर जाति है, दूजा सोच निवार ।
मैली मध्यम हो गये, ऊजल ऊंच विचार ॥ १३ ॥
(सारग्राही अंग १७)
इत्यादिक अनेक साखियां जाति विचार सम्बंधी सुनाकर फिर ब्रह्मचर्य, गृहस्त, वानपस्थ, सन्यास आदि धर्म संबंधी अपनी साखियों को सुनाकर सबके धर्म अपने विचारों के अनुसार सुनाये फिर अखंड भक्ति करने की प्रेरणा की -
ज्ञान भक्ति मन मूल गहि, सहज प्रेम ल्यो लाय ।
दादू सब आरंभ तज, जनि काहूं संग जाय ॥ ७ ॥
(लय अंग ७)
फिर सत्संग समाप्त कर दिया । अकबरादि प्रणाम करके चले गये ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें