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सीकरी प्रसंग १९ वें दिन
अकबर ने कहा- भगवन् ! जिज्ञासु के लक्षण कहने की कृपा कीजिये ?
दादूजी ने कहा- जो चार साधनों से युक्त हो और परब्रह्म को जानना चाहता हो उसे ही जिज्ञासु कहते हैं ।
अकबर- वे चार साधन कौन से हैं ?
दादूजी- १- विवेक, २- वैराग्य, ३- शमादिषट्सम्पति, ४- मुमुक्षता ।
अकबर- इनके भिन्न-भिन्न लक्षण कहने की कृपा करें ?
तब दादूजी ने कहा-
दादूजी ने कहा- जो चार साधनों से युक्त हो और परब्रह्म को जानना चाहता हो उसे ही जिज्ञासु कहते हैं ।
अकबर- वे चार साधन कौन से हैं ?
दादूजी- १- विवेक, २- वैराग्य, ३- शमादिषट्सम्पति, ४- मुमुक्षता ।
अकबर- इनके भिन्न-भिन्न लक्षण कहने की कृपा करें ?
तब दादूजी ने कहा-
हंस गियानी सो भला, अंतर राखे एक ।
विष में अमृत काढिले, दादू बड़ा विवेक ॥ ३ ॥
(सारग्राही अंग १७)
इसीको विवेक कहते हैं । वैराग्य भी सुनिये -
वैराग्य- दादू सूक्ष्म मांहिंले, तिन का कीजे त्याग ।
सब तज राता राम से, दादू यहु वैराग ॥ १९ ॥
(विचार अंग १८)
शमदम- उत्तम इन्द्रिय निग्रहं, मुच्यते माया मनः ।
परम पुरुष पुरातन, चिंतते सदा तनः ॥ ६१ ॥
(स्म. अंग २)
श्रद्धा- सद्गुरु कहै सु कीजिये, जे तु शिष्य सुजाण ।
जहां लाया तहं लाग रहु, बूझे कहा अजाण ॥ १०८ ॥
(गुरु अंग १)
समाधान- जब मन मृतक हो रहे, इंन्द्रिय बल भागा ।
सांई सेती संग कर, सहज सुरति ले पूर ॥ २४ ॥
(लै अंग ७)
तितिक्षा- विपत भली हरिनाम से, काया कसौटी दुःख ।
राम बिना किस काम का, दादू संपत्ति सुःख ॥ ४१ ॥
(विश्वास अंग १९)
मुमुक्षता- जिन हम सिरजे सो कहां, सद्गुरु देहु दिखाय ।
दादू दिल अरवाह का, तहँ मालिक ल्यो साय ॥ ४२ ॥
(गुरु अंग १)
क्षुधा तृषा क्यों भूलिये, शीत तपत क्यों जाय ।
क्यों सह छूटे देह गुण, सद्गुरु कह समझाय ॥ २२ ॥
(विचार अंग १८)
मुझ ही में मेरा धणी, पड़दा खोल दिखाय ।
आतम से परआतमा, परगट आणि मिलाय ॥ ४३ ॥
साक्षात्कार- सद्गुरु कहै सु शिष करे, सब सिध कारज होय ।
अमर अभय पद पाइए, काल न लागे कोय ॥ ९७ ॥
(गुरु अंग १)

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