🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*श्री सन्त-गुण-सागरामृत श्री दादूराम कथा अतिपावन गंगा* ~
स्वामी माधवदास जी कृत श्री दादूदयालु जी महाराज का प्राकट्य लीला चरित्र ~
संपादक-प्रकाशक : गुरुवर्य महन्त महामण्डलेश्वर संत स्वामी क्षमाराम जी ~
.
*(“एकविंशति तरंग” ३३/३४)*
.
*कथा सत्संग नित्य होता -*
भूप नरायण सेव करे बहु,
लाय पदारथ धाम धराये ।
एक भण्डार बनाय सुसज्जित,
केशवदास भंडारि रखाये ।
आगत संत रु सेवक पावत,
अन्न प्रसाद रु वस्त्र सुभाये ।
होवत संतकथा नित निर्मल,
ब्रह्महि धामजु दादु रहाये ॥३३॥
भूप नारायणसिंह भी अतीव श्रद्धा से गुरुदेव और संतों की सेवा में तत्पर रहते । संतों की आवश्यकतानुसार विविध पदार्थ सामग्री लाकर संत धाम में रखवाता रहता । उद्यान के समीप एक भण्डार का भी निर्माण कराया गया, जिसकी व्यवस्था का भार शिष्य केशवदास जी को सौंपा गया । इस दादू भण्डार में आगत संत सेवक नित्य अन्न प्रसाद पाते रहते । संतों को वस्त्रादि अन्य सामग्री भी इसी भण्डार से उपलब्ध होती थी । नित्य संत सभा में कथा कीर्तन सत्संग होता रहता । इस तरह ब्रह्मधाम में श्रीदादूजी विराजने लगे ॥३३॥
.
*ब्रह्म धाम में श्रीदादूजी की महिमा -*
संत सुथान सुनाम उजागर,
दादुहि द्वार उचार करे हैं ।
सम्परदाय सबै भय मानत,
संत प्रतापहिं देखि डरे हैं ।
दूर रहें खल, तेज तपोबल,
भक्तन्ह के सब ताप हरे हैं ।
माधवदास दिये गुरु दादुजि,
एक अद्वैत उपासि खरे हैं ॥३४॥
संतों की महिमा चारों तरफ फैलने लगी । लोक - समुदाय ब्रह्म धाम को दादूद्वारा भी कहने लगे । अन्य विद्वेषी सम्प्रदायी श्रीदादूजी के तप प्रताप से डरते रहते । संतों के तपोबल के कारण खल दूर - दूर ही रहते । श्रीदादूजी की कृपा से भक्त संत सेवकों के सब सन्ताप दूर ही रहते । माधवदास कहते हैं कि - अद्वैत ब्रह्म की उपासना में निरंतर रहते हुये श्री दादूजी देदीप्यमान होने लगे ॥३४॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें