सोमवार, 13 अक्टूबर 2014

सूरज कोटि प्रकास है

#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
सूरज कोटि प्रकास है, रोम रोम की लार ।
दादू ज्योति जगदीश की, अंत न आवै पार ॥ 
ज्यों रवि एक आकाश है, ऐसे सकल भरपूर ।
दादू तेज अनन्त है, अल्लह आली नूर ॥ 
सूरज नहीं तहँ सूरज देख्या, चंद नहीं तहँ चन्दा ।
तारे नहीं तहँ झिलमिल देख्या, दादू अति आनन्दा ॥

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