*卐~卐 *श्री दादूवाणी दर्शन* 卐~卐* 卐*Shri Daduvani Darshan*卐
परमगुरु ब्रह्मर्षि श्री दादूदयाल जी महाराज की अनुभव वाणी
सोमवार, 13 अक्टूबर 2014
सूरज कोटि प्रकास है
#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
सूरज कोटि प्रकास है, रोम रोम की लार ।
दादू ज्योति जगदीश की, अंत न आवै पार ॥
ज्यों रवि एक आकाश है, ऐसे सकल भरपूर ।
दादू तेज अनन्त है, अल्लह आली नूर ॥
सूरज नहीं तहँ सूरज देख्या, चंद नहीं तहँ चन्दा ।
तारे नहीं तहँ झिलमिल देख्या, दादू अति आनन्दा ॥
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