रविवार, 5 अक्टूबर 2014

= १२८ =

#daduji
卐 सत्यराम सा 卐 
ज्यूं अमली के चित अमल है, सूरे के संग्राम । 
निर्धन के चित धन बसै, यों दादू के राम ॥ 
ज्यूं चातक के चित जल बसैं, ज्यूं पानी बिन मीन । 
जैसे चंद चकोर है, ऐसे दादू हरि सौं कीन ॥ 
ज्यूं कुंजर के मन वन बसै, अनल पंखी आकास । 
यूं दादू का मन राम सौं, ज्यूं वैरागी वनखंड वास ॥ 
भँवरा लुब्धी बास का, मोह्या नाद कुरंग । 
यों दादू का मन राम सौं, ज्यों दीपक ज्योति पंतग ॥ 
श्रवणा राते नाद सौं, नैनां राते रूप । 
जिभ्या राती स्वाद सौं, त्यों दादू एक अनूप ॥ 
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My Lord! I'm Yours and only yours (नाथ मैँ थारो जी थारो !!) 
भगवान का स्मरण कैसे करें ? 
१. ऐसे करो, जैसे अफीमची अफीम के न मिलने पर अफीम का स्मरण करता है । 
२. ऐसे करो, जैसे मुकदमेबाज मुकद्दमे का स्मरण करता है । 
३. ऐसे करो, जैसे जुआरी जुए का स्मरण करता है । 
४. ऐसे करो, जैसे लोभी धन का स्मरण करता है । 
५. ऐसे करो, जैसे कमी कामिनी का स्मरण करता है । 
६. ऐसे करो, जैसे जैसे शिकारी शिकार का स्मरण करता है । 
७. ऐसे करो, जैसे निशानेबाज निशाने का स्मरण करता है । 
८. ऐसे करो, जैसे किसान पके खेत का करता है । 
९. ऐसे करो, जैसे प्यास से व्याकुल मनुष्य जल का स्मरण करता है । 
१०. ऐसे करो, जैसे भूख से सताया हुआ मनुष्य भोजन का स्मरण करता है ।
११. ऐसे करो ,जैसे घर भुला हुआ मनुष्य घर का स्मरण करता है । 
१२. ऐसे करो, जैसे थका हुआ मनुष्य विश्रामका स्मरण करता है । 
१३. ऐसे करो, जैसे भय से कातर मनुष्य शरण देने वाले का स्मरण करता है ।
१४. ऐसे करो, जैसे डूबता हुआ मनुष्य जीवन रक्षा का स्मरण करता है । 
१५. ऐसे करो, जैसे दम घुटने पर मनुष्य वायु का स्मरण करता है । 
१६. ऐसे करो, जैसे परीक्षार्थी परीक्षा के विषय का स्मरण करता है । 
१७. ऐसे करो, जैसे ताजे पुत्रवियोग से पीड़ित माता पुत्र का स्मरण करती है । 
१८. ऐसे करो, जैसे नवीन विधवा अबला अपने मृत पति का स्मरण करती है ।
- श्रद्धेय भाईजी श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार, गोरखपुर 
नारायण ! नारायण !! नारायण !!! नारायण !!! नारायण !!!

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