#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
ज्यूं अमली के चित अमल है, सूरे के संग्राम ।
निर्धन के चित धन बसै, यों दादू के राम ॥
ज्यूं चातक के चित जल बसैं, ज्यूं पानी बिन मीन ।
जैसे चंद चकोर है, ऐसे दादू हरि सौं कीन ॥
ज्यूं कुंजर के मन वन बसै, अनल पंखी आकास ।
यूं दादू का मन राम सौं, ज्यूं वैरागी वनखंड वास ॥
भँवरा लुब्धी बास का, मोह्या नाद कुरंग ।
यों दादू का मन राम सौं, ज्यों दीपक ज्योति पंतग ॥
श्रवणा राते नाद सौं, नैनां राते रूप ।
जिभ्या राती स्वाद सौं, त्यों दादू एक अनूप ॥
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My Lord! I'm Yours and only yours (नाथ मैँ थारो जी थारो !!)
भगवान का स्मरण कैसे करें ?
१. ऐसे करो, जैसे अफीमची अफीम के न मिलने पर अफीम का स्मरण करता है ।
२. ऐसे करो, जैसे मुकदमेबाज मुकद्दमे का स्मरण करता है ।
३. ऐसे करो, जैसे जुआरी जुए का स्मरण करता है ।
४. ऐसे करो, जैसे लोभी धन का स्मरण करता है ।
५. ऐसे करो, जैसे कमी कामिनी का स्मरण करता है ।
६. ऐसे करो, जैसे जैसे शिकारी शिकार का स्मरण करता है ।
७. ऐसे करो, जैसे निशानेबाज निशाने का स्मरण करता है ।
८. ऐसे करो, जैसे किसान पके खेत का करता है ।
९. ऐसे करो, जैसे प्यास से व्याकुल मनुष्य जल का स्मरण करता है ।
१०. ऐसे करो, जैसे भूख से सताया हुआ मनुष्य भोजन का स्मरण करता है ।
११. ऐसे करो ,जैसे घर भुला हुआ मनुष्य घर का स्मरण करता है ।
१२. ऐसे करो, जैसे थका हुआ मनुष्य विश्रामका स्मरण करता है ।
१३. ऐसे करो, जैसे भय से कातर मनुष्य शरण देने वाले का स्मरण करता है ।
१४. ऐसे करो, जैसे डूबता हुआ मनुष्य जीवन रक्षा का स्मरण करता है ।
१५. ऐसे करो, जैसे दम घुटने पर मनुष्य वायु का स्मरण करता है ।
१६. ऐसे करो, जैसे परीक्षार्थी परीक्षा के विषय का स्मरण करता है ।
१७. ऐसे करो, जैसे ताजे पुत्रवियोग से पीड़ित माता पुत्र का स्मरण करती है ।
१८. ऐसे करो, जैसे नवीन विधवा अबला अपने मृत पति का स्मरण करती है ।
- श्रद्धेय भाईजी श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार, गोरखपुर
नारायण ! नारायण !! नारायण !!! नारायण !!! नारायण !!!

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