मंगलवार, 18 नवंबर 2014

= “च. विं. त.” १९/२० =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*श्री सन्त-गुण-सागरामृत श्री दादूराम कथा अतिपावन गंगा* ~
स्वामी माधवदास जी कृत श्री दादूदयालु जी महाराज का प्राकट्य लीला चरित्र ~
संपादक-प्रकाशक : गुरुवर्य महन्त महामण्डलेश्‍वर संत स्वामी क्षमाराम जी ~
.
*(“चतुर्विंशति तरंग” १९/२०)*
.
*गरीबदास जी को गाद्दी विराजमान ~*
यों सुनि साधुन बेगि बुलावत, 
संत महंत जुड़े सब आये ।
रामहिं चोक सभा करि बैठत, 
नौतम अम्बर पाट बिछाये ।
भूप नरायन एक गहे कर, 
दूसर ही प्रहलाद गहाये ।
पूर्णिम ज्येठ सुदी शुभ मुहुरत, 
दास गरीब हिं टीक कराये ॥१९॥ 
ऐसा समझाने पर सभी साधु संतों को बुलाया गया । रामचौक में संत सभा आयोजित हुई । नवतम अम्बर बिछाये गये, बीच में एक पाट(चौकी) लगाई गई । गरीबदासजी के एक हाथ को राजा नारायणसिंह ने सादर सहारा दिया, दूसरे हाथ को प्रहलाददास जी ने संभाला और आदर सहित सभी संतों के बीच में गुरुगद्दी पर ले जाकर विराजमान किया । ज्येष्ठ पूर्णिमा को शुभ मुहूर्त में सायं गरीबदासजी के मस्तक पर गुरुगद्दी निर्वाह के लिये तिलक किया गया ॥१९॥ 
.
*जो वस्त्र दादूजी ने उतारे वह वस्त्र गरीबदास जी ने धारण किये ~*
*छन्द*
दादु दयालु के पाट बिराजत, 
जोरहिं पाणि सबै शिर नाये ।
जै जय शब्द कियो सब साधु जु, 
केसर कुंकुम को बरसाये ।
जो शुचि भेष धरयो गुरु दादु जु, 
दास गरीब वही पहनाये ।
संत महंत रु भूपति सेठ जु, 
शाल दुशाल चढाय उठाये ॥२०॥ 
सभी साधु संत, भक्त सेवकों ने जय-जयकार करते हुये उन्हें प्रणाम किया । बारी-बारी से हाथ जोड़कर शीश निवाया । केशर कुंकुम बरसायी गई । जो शुचि वेश श्री दादूजी ने ग्रहण किया था, वही वेश गरीबदास जी ने धारण किया । स्थान धारी संत महंतों ने तथा राजा और सेठ साहूकारों ने गरीबदास जी को शाल दुशाले चढ़ाये ॥२०॥ 
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें