🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
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*श्री सन्त-गुण-सागरामृत श्री दादूराम कथा अतिपावन गंगा* ~
स्वामी माधवदास जी कृत श्री दादूदयालु जी महाराज का प्राकट्य लीला चरित्र ~
संपादक-प्रकाशक : गुरुवर्य महन्त महामण्डलेश्वर संत स्वामी क्षमाराम जी ~
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*(“चतुर्विंशति तरंग” २१/२२)*
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*गरीबदास जी को वस्त्र भेंट चढाया ~*
भूप रु संत जु भेंट चढावत, सेवक साधु निछावर लाये ।
नौतम अम्बर भेंट दिरावत, संत महंत संतुष्ट कराये ।
ज्यों मधु मास पते तरु डारत, होत हरे तरु पत्तर छाये ।
त्यों सब साधुन दें नव अम्बर, जो घर बाहिर के जन आये ॥२१॥
राजा तथा संतों ने गुरुगद्दी की श्रद्धा में भेंट चढ़ाई । अनेक साधुओं सेवकों ने विविध उपहार निछावर किये । गरीबदास जी ने भी समागत सभी साधु संतों तथा सेवकों को नवतम अम्बर प्रसाद सहित प्रदान किये । उनका सम्मान करके संतुष्ट किया । जैसे मधु मास में तरु वनस्पति अपने पत्ते डाल देते हैं, और उन पर फिर से नवीन पत्ते उभर आते हैं, उसी प्रकार समागत साधु संतों और भक्त सेवकों ने अपनी सम्पतियाँ गरीबदास जी को भेंट स्वरूप समर्पित कर दी थी, किन्तु गरीबदास जी ने यथोचित सम्मान के साथ उन्हें पुन: प्रसाद स्वरूप वस्त्रादि वितरित कर दिये ॥२१॥
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*छप्पय*
*साधु संत आये को भेट दक्षिणा ~*
भेद नाहिं जु आप - दूसर, करत सब जन आदरा ।
संत अम्बर देत नौतम, विविध पट अरु चादरा ।
भयो कौतुक भीड़ भीतर, देत अम्बर बहु धना ।
संत स्तुति करत नाना, दास माधव हरि जना ॥२२॥
गरीबदास जी ने अपने पंथ के साधुओं तथा समागत अन्य सम्प्रदायी साधुओं में कोई भेद नहीं किया । सभी को समान रूप से सम्मान तथा भेंट प्रसाद वितरित किया । नौतम अम्बर चादर, दुशाले, धन तथा विविध उपहार पाकर संत, सेवक अत्यन्त प्रसन्न हुये, तथा जय - जयकार करते हुये गरीबदास जी की प्रशंसा करने लगे । संतों की संस्तुतियों का वर्णन माधवदास अपने शब्दों में प्रस्तुत कर रहा है ॥२२॥
(क्रमशः)

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