#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
यहु घट बोहित धार में, दरिया वार न पार ।
भैभीत भयानक देखकर, दादू करी पुकार ॥
कलियुग घोर अंधार है, तिसका वार न पार ।
दादू तुम बिन क्यों तिरै, समर्थ सिरजनहार ॥
काया के वश जीव है, कस कस बँध्या मांहि ।
दादू आत्मराम बिन, क्यों ही छूटै नांहि ॥
दादू प्राणी बँध्या पंच सौं, क्योंही छूटै नांहि ।
निधणी आया मारिये, यहु जीव काया मांहि ॥
तुम बिन धणी न धोरी जीव का, यों ही आवै जाइ ।
जे तूँ सॉंई सत्य है, तो बेगा प्रकटहु आइ ॥
निधणी आया मारिये, धणी न धोरी कोइ ।
दादू सो क्यूँ मारिये, साहिब सिर पर होइ ॥

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