मंगलवार, 18 नवंबर 2014

= १९१ =

#daduji
卐 सत्यराम सा 卐 
दादू तो तूं पावै पीव को, जे जीवित मृतक होइ । 
आप गँवाये पीव मिलै, जानत हैं सब कोइ ॥ 
दादू तो तूं पावै पीव का, आपा कुछ न जान । 
आपा जिस तैं ऊपजै, सोई सहज पिछान ॥ 
दादू तो तूं पावै पीव को, मैं मेरा सब खोइ । 
मैं मेरा सहजैं गया, तब निर्मल दर्शन होइ ॥ 
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साभार : नितिन सिंह ~ 
भारतीय इतनी आसानी से आत्महत्या नहीं करते, क्योंकि वो जानते हैं कि वो फिर पैदा हो जायेंगे, पश्चिम में आत्महत्या और आत्महत्या के तरीके खोज करते हैं ! 
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बहुत लोग आत्महत्या करते हैं, और मनस्विद कहते हैं कि बहुत कम लोग होते हैं जो ऐसा करने का नहीं सोचते हैं. दरअसल एक आदमी ने खोज कर के कुछ माहिती इकट्ठी की थी, और उसका कहना है कि - हर एक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम ४ बार आत्महत्या करने को सोचता है, पर ये पश्चिम की बात है, पूरब में, चूँकि लोग पुनर्जन्म के बारे में जानते हैं इसलिए कोई आत्महत्या नहीं करना चाहता है - फायदा क्या है ? तुम एक दरवाज़े से निकलते हो और किसी और दरवाजे से फिर अन्दर आ जाते हो, तुम इतनी आसानी से नहीं जा सकते. 
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मौत आएगी, वो हमेशा आती है, तुम्हारे ना चाहते हुए भी वो आती है ! तुम्हे उसे जाकर मिलने की ज़रुरत नहीं है, वो अपने आप आ जाती है ! पर तुम अपने जीवन को बुरी तरह से miss करोगे. तुम क्रोध, या चिंता की वजह से suicide करना चाहते हो ! मैं तुम्हे असली आत्महत्या करना सिखाऊंगा, एक सन्यासी बन जाओ. तुम हमेशा के लिए जा सकते हो, इसी का मतलब है ''बुद्ध'' बनना - हमेशा के लिए चले जाना !

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