गुरुवार, 1 जनवरी 2015

= ७६ =

#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
साधु जन संसार में, पारस प्रकट गाइ ।
दादू केते उद्धरे, जेते परसे आइ ॥
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साभार : @Yogendra G Bhatia ~

सत्संग से ही संस्कारों की प्राप्ति होती है। सत्संग करने से भगवत्प्राप्ति का मार्ग दिखलायी पड़ता है। जिस मार्ग से सत्पुरुष गए हैं, उसी मार्ग पर चले बिना हमें भगवत्प्राप्ति का मार्ग नहीं मिल सकता। दुर्व्यसनी के कुछ पल के संग से हमारे संचित संस्कार तक लुप्त हो जाते हैं। वह सहज ही में दुर्व्यसनों की ओर आकर्षित करने में सफल हो जाता है। अत: भूलकर भी दुर्व्यसनी, नास्तिक तथा हर समय सांसारिक प्रपंचों में फँसे रहनेवाले व्यक्ति का संग कदापि नहीं करना चाहिये।

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