#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
दादू झूठा साचा कर लिया, विष अमृत जाना ।
दुख को सुख सब को कहै, ऐसा जगत दिवाना ॥
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साभार : Rp Tripathi ~
**गुरु-ज्ञान :: सम्बन्धों में विखराव : मनो-भावों में दुराव :: एक चिंतन**
कहते हैं ---
लाख फूल भी कम हैं, गर्दन अपनी सजाने को; एक भूल ही काफी है, जिंदगी भर रुलाने को ..!! ..... और वह भूल है -- मनोभावों में दुराव ..!!
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हम अज्ञानता-वश यह सोचते हैं कि, यदि हम शारीरिक रूप से किसी व्यक्ति के साथ रह रहे हैं, उसके कार्य में हिस्सा बटा रहे हैं, उसे शारीरिक-सुख पहुँचा रहे हैं, वाणी से भी व्यक्ति के लिए प्रसंशात्मक शब्द बोल रहे हैं, तो यह पर्याप्त हैं, हमारे सम्बन्धों में स्थिरता के लिए ...!!
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परन्तु यहाँ हम, एक सबसे बड़ी भूल कर जाते हैं कि --- जब भी हमें, किसी भी कारण से, अपने मनोभावों को छुपाना पड़े, अर्थात मनोभावों की, वाचा और कर्मणा के साथ एक रूपता ना हो तो, हमारा यह सम्पूर्ण व्योहार, एक ठग की तरह हो जाता है ...!! और फिर, ठग का सत्य तो, एक दिन प्रगट होता ही है, और वह भी विपरीत परिणाम, अर्थात, सम्बन्धों में बिखराव के साथ ...!!
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इसलिए संतों ने कहा है ---
कबीरा आप ठगाइये, और ना ठगिये कोय;
आप ठगे सुख ऊपजे, और ठगे दुःख होय ..!!
अतः, हमें जरूरत है, अपने मनोभावों को प्रगट कर व्योहार करने की ..!! यदि हमारी, किसी के भी साथ विचारों में एकरूपता नहीं है, तो हम इसे, उस व्यक्ति पर अवश्य ही प्रगट करें ..!!
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उदाहणार्थ -- जैसे किसी का पति, शराब पीता है, और पत्नी को पसंद नहीं है, तो उसे साफ़ साफ़ उससे कहना चाहिए कि --- मुझे तुम्हारा शराब पीना अच्छा नहीं लगता है, क्योंकि यह सेहत के लिए खराब है, परन्तु मैं तुम्हें घर में, पेग बना कर इसलिए दे रही हूँ, जिससे तुम्हें, इसके लिए घर से बाहर ना जाना पड़े ...!!
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तो एक ना एक दिन इसका असर, पति पर अवश्य ही होगा, और वह भी प्रयत्न करेगा, शराब छोड़ने का ..!! और यदि किसी कारण वश नहीं छोड़ पाया तो भी, पत्नी के प्रति, आदर का भाव तो हमेशा ही, उसके अंदर निवास करेगा ..!!
क्योंकि अंतरात्मा में तो, वह भी जानता है कि, पत्नी के मनोभाव, और उसके मनो-भावों में, एक रूपता है, सिर्फ संयम की दक्षता में, अंतर है ..!!
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अतः सम्बन्धों में प्रगाढ़ता के लिए, अपने मनोभावों को प्रगट कर, व्योहार करने में ही समझदारी है ..!! अब चाहे वह सम्बन्ध, पति-पत्नी के बीच हों, माँ-बेटी/बेटा के बीच हों, पिता-पुत्र/पुत्री के बीच हों, दो मित्रों के बीच हों .. आदि आदि ..!! ....

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