सोमवार, 12 जनवरी 2015

#daduji 
दादू सब ही मृतक समान हैं, जीया तब ही जाण ।
दादू छांटा अमी का, को साधु बाहे आण ॥
सबही मृतक ह्वै रहे, जीवैं कौन उपाइ ।
दादू अमृत रामरस, को साधू सींचे आइ ॥
सब ही मृतक देखिये, क्यों कर जीवैं सोइ ।
दादू साधु प्रेम रस, आणि पिलावे कोइ ॥
सब ही मृतक देखिये, किहिं विधि जीवैं जीव ।
साधु सुधारस आणि करि, दादू बरसे पीव ॥

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