#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
प्राण कवल मुख राम कहि, मन पवना मुख राम ।
दादू सुरति मुख राम कहि, ब्रह्म शून्य निज ठाम ॥
दादू कहतां सुणातां राम कह, लेतां देतां राम ।
खातां पीतां राम कह, आत्म कवल विश्राम ॥
ज्यूं जल पैसे दूध में, ज्यूं पाणी में लौंण ।
ऐसे आत्मराम सौं, मन हठ साधै कौंण ॥
दादू राम नाम में पैस कर, राम नाम ल्यौ जाइ ।
यहु इंकत त्रिय लोक में, अनत काहे को जाइ ॥
=================
साभार : Krishnacharandas Aurobindo ~
.
गोकर्णदास-----(वृँदावन के महात्मा) -
जय सीताराम
राम सिर्फ एक नाम नहीं अपितु एक मंत्र है, जिसका नित्य स्मरण करने से सभी दु:खों से मुक्ति मिल जाती है।
राम शब्द का अर्थ है- मनोहर, विलक्षण, चमत्कारी, पापियों का नाश करने वाला व भवसागर से मुक्त करने वाला।
.
रामचरित मानस के बालकांड में एक प्रसंग में लिखा है-
नहिं कलि करम न भगति बिबेकू।
राम नाम अवलंबन एकू॥
अर्थात कलयुग में न तो कर्म का भरोसा है, न भक्ति का और न ज्ञान का। सिर्फ राम नाम ही एकमात्र सहारा है।
.
स्कंदपुराण में भी राम नाम की महिमा का गुणगान किया गया है-
रामेति द्वयक्षरजप: सर्वपापापनोदक:।
गच्छन्तिष्ठन् शयनो वा मनुजो रामकीर्तनात्॥
इड निर्वर्तितो याति चान्ते हरिगणो भवेत्।
- स्कंदपुराण/ नागरखंड
अर्थात यह दो अक्षरों का मंत्र (राम) जपे जाने पर समस्त पापों का नाश हो जाता है। चलते, बैठते, सोते या किसी भी अवस्था में जो मनुष्य राम नाम का कीर्तन करता है, वह यहां कृतकार्य होकर जाता है और अंत में भगवान विष्णु का पार्षद बनता है।
.
श्रीरामरक्षास्तोत्र के अंतिम श्लोक में बाबा भोलेनाथ माँ पार्वती से कहकर attested कर देते हैं -
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्त्र नाम तत् त्तुल्यं राम नाम वरानने ॥
किसी भी देवी/देवता के सहस्त्र (१०००) नामों को लेने का समय अगर आज के व्यस्त समय में ना मिले तो ""एक राम /कृष्ण नाम"" ही सहस्त्रनाम के बराबर है ।
.
कलियुग का एक अच्छा पक्ष है की हज़ारों यज्ञों का पुण्य सिर्फ नाम संकीर्तन से मिल जाता है ....
जय जय सियाराम॥

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें