#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
दादू जब दिल मिली दयालु सौं, तब अंतर कुछ नांहि ।ज्यों पाला पाणी कों मिल्या, त्यों हरिजन हरि मांहि ॥
दादू जब दिल मिली दयालु सौं, तब सब पड़दा दूर ।
ऐसैं मिल एकै भया, बहु दीपक पावक पूर ॥
दादू जब दिल मिली दयालु सौं, तब अंतर नांही रेख ।
नाना विधि बहु भूषणां, कनक कसौटी एक ॥
दादू जब दिल मिली दयालु सौं, तब पलक न पड़दा कोइ ।
डाल मूल फल बीज में, सब मिल एकै होइ ॥
फल पाका बेली तजी, छिटकाया मुख मांहि ।
सांई अपना कर लिया, सो फिर ऊगै नांहि ॥
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साभार : Ramjibhai Jotaniya ~
"प्रश्नों का खो जाना ही प्रश्नों से
मुक्ति है, यही सारे प्रश्नों के उत्तर है,
वासनाओं का ख़तम हो जाना ही वासनाओं
से मुक्ति है, यही सारी वासनाओं
की पूर्णता है." - स्वामी शून्यानन्द
"The answers of all questions are
possible only by dissolving all the
questions,
Desires can be fulfilled only by
dissolving all the desires meant
getting free from all the desires."-
Swami Shoonyanand
"प्रश्नों का खो जाना ही प्रश्नों से
मुक्ति है, यही सारे प्रश्नों के उत्तर है,
वासनाओं का ख़तम हो जाना ही वासनाओं
से मुक्ति है, यही सारी वासनाओं
की पूर्णता है." - स्वामी शून्यानन्द
"The answers of all questions are
possible only by dissolving all the
questions,
Desires can be fulfilled only by
dissolving all the desires meant
getting free from all the desires."-
Swami Shoonyanand

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