#daduji
卐 सत्यराम 卐
अपनी अपनी जाति सौं, सब को बैसैं पांति ।
दादू सेवग राम का, ताके नहीं भरांति ॥
दादू पानी के बहु नाम धर, नाना विधि की जात ।
बोलणहारा कौन है, कहो धौं कहाँ समात ॥
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साभार : Ramgopal Goyal ~
"राम भक्त शबरी भीलनी चरित्र"
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६१: आजा अंदर डर मती, साधक - साधु समाज।
मैं सबसे लड जाऊंगा, तेरी खातिर आज॥
हैरानी से देखने, लगे आश्रम लोग।
कहां ? मुनि कहाँ ? भीलनी, कैसा अजब प्रयोग॥
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६२: किन्तु न कुछ, बोला कोई, सभी रहे चुपचाप।
शायद रीझे इसलिए, क्योंकि चाह इस जाप॥
एक तो नीची कौम की, दूजी औरत जात।
फिर भी रुचि है भक्ति में, तो यह ऊंची बात॥
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६३: दीनी कुटिया एक बता, अरु कुछ सेवा काम।
दीक्षा में, मुनि दे दिया, नाम, प्रभु श्रीराम॥
मुनि चरणों में, धोक दे, प्रकट किया आभार।
तोडीं सभी परम्परा, खोले मुझको द्वार॥
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६४: मैं तो कटी पतंग थी, मंजिल से अनजान।
डोर थाम ली आपने, किया परम अहसान॥
अब निश्चित मिल जाएगी, मुझको मेरी राह।
अब तो होकर ही रहें, पूरी सब मम चाह॥

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