शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

= ५२ =


卐 सत्यराम सा 卐
तिल तिल का अपराधी तेरा, रती रती का चोर ।
पल पल का मैं गुनही तेरा, बख्शो अवगुण मोर ॥
महा अपराधी एक मैं, सारे इहि संसार ।
अवगुण मेरे अति घणे, अन्त न आवैं पार ॥ 
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साभार ~ Ramgopal Goyal Rotiram ~
"प्रभु श्रीराम के चरणों में आर्त पुकार"
तर्ज - राम सियाराम, सियाराम जय जय राम ।
राम सियाराम,सियाराम जय जय राम।।

卐 ऐब बुराई रच - पच गए हैं, 
गुण गए छोड, दोष बच गए हैं।
जकडा है, इनने कुछ ऐसा, 
कालियनाग कृष्ण तब जैसा।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।।

卐 मुझसे कुछ सत्कर्म न होता, 
सो तेरे नहीं, काबिल होता।
लगा हुआ है, आना - जाना,
क्योंकि हूँ, मंजिल से अनजाना।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।।

卐 दिन पर दिन तन, शिथिल हो रहा, 
कल क्या ? होगा, सोच रो रहा।
शिथिल बदन हो, भक्ति कैसे ?
कैसे ? होगी, मुक्ति ऐसे।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।

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