🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*सवैया ग्रन्थ(सुन्दर विलास)*
साभार ~ @महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य - श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व
राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
.
*३४. आश्चर्य को अंग*
.
*भूमि ही न आप न तौ तेज ही न ताप न तौ,*
*बायु हू न ब्योम न तौ पंच कौ पसारौ है ।*
*हाथ ही न पाँव न तौ नैंन बैंन भाव न तौ,*
*रंक ही न राव न तौ बृद्ध ही न बारौ है ॥*
*पिंड हीई न प्रांन न तौ जांन न अजांन न तौ,*
*बंध निरबान न तौ हरवौ न भारौ है ।*
*द्वैत न अद्वैत न तो भीत न अभीत तातैं,*
*सुन्दर कह्यौ न जाइ मिल्यौ ही न न्यारौ है ॥५॥*
न वह(ब्रह्म) भूमि आदि पृथक् पृथक् पाँच तत्व है, न इन पञ्च तत्वों से निर्मित अन्य कोई रचना है ।
उस के न हाथ हैं, न पैर; न नेत्र हैं न वाणी । न वह राजा है न दीन हीन, न वृद्ध है न बालक ।
न वह शरीर है, न प्रान; न वह ज्ञात है, न अज्ञात । न बद्ध है न मुक्त; न हलका है न भारी ।
*श्री सुन्दरदास जी* कहते हैं - वह न द्वैत है, न अद्वैत । न वह भीत है न निर्भय । यहाँ तक कि वह न किसी से मिला हुआ है, न वह किसी से पृथक् ही है ॥५॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें