🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*#श्रीदादूचरितामृत*, *"श्री दादू चरितामृत(भाग-२)"*
लेखक ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज,
पुष्कर, राजस्थान ।*
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*= विन्दु ७२ =*
*= टौंक प्रसंग =*
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टौंक संत सम्मलेन का समीप आ जाने से चाटसू से दादूजी अपने शिष्यों के सहित टौंक ही पधारे । तब टौंक में माधवकाणी और नरहरिदासजी को पता चला कि स्वामी दादूजी पधार गये हैं, तब वे बड़ी धूम-धाम से संत मंडल तथा भक्त मंडल के साथ संकीर्तन करते हुये दादूजी महाराज के सामने आये और अति सत्कार पूर्वक प्रणामादि करके पूजन किया फिर संकीर्तन करते हुये अंधेरे बाग में लाये और वहां ठहरा दिया । वहां पर सब प्रकार की सुविधा का प्रबन्ध कर दिया गया था ।
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इस संत सम्मलेन रूप उत्सव में अनेक देशों से संतों को निमंत्रण देकर बुलाया था । वे आने लगे तब उन को सत्कार पूर्वक यथा योग्य स्थानों पर माधवकाणी ठहराते थे । वहां उस समय वैष्णवों के चारों संप्रादायों के संत एकत्र हुये थे । चारों ओर से जय-जयकार शब्द सुनने में आता था । अंधेरे बाग में बाजार भी लग गया था । कारण, संतों के दर्शन करने बहुत जनता आती थी । वे आने वाले लोग कुछ न कुछ खरीदते ही थे । उनके लिये बाजार लगा था ।
(क्रमशः)
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पुष्कर, राजस्थान ।*
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*= विन्दु ७२ =*
*= टौंक प्रसंग =*
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टौंक संत सम्मलेन का समीप आ जाने से चाटसू से दादूजी अपने शिष्यों के सहित टौंक ही पधारे । तब टौंक में माधवकाणी और नरहरिदासजी को पता चला कि स्वामी दादूजी पधार गये हैं, तब वे बड़ी धूम-धाम से संत मंडल तथा भक्त मंडल के साथ संकीर्तन करते हुये दादूजी महाराज के सामने आये और अति सत्कार पूर्वक प्रणामादि करके पूजन किया फिर संकीर्तन करते हुये अंधेरे बाग में लाये और वहां ठहरा दिया । वहां पर सब प्रकार की सुविधा का प्रबन्ध कर दिया गया था ।
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इस संत सम्मलेन रूप उत्सव में अनेक देशों से संतों को निमंत्रण देकर बुलाया था । वे आने लगे तब उन को सत्कार पूर्वक यथा योग्य स्थानों पर माधवकाणी ठहराते थे । वहां उस समय वैष्णवों के चारों संप्रादायों के संत एकत्र हुये थे । चारों ओर से जय-जयकार शब्द सुनने में आता था । अंधेरे बाग में बाजार भी लग गया था । कारण, संतों के दर्शन करने बहुत जनता आती थी । वे आने वाले लोग कुछ न कुछ खरीदते ही थे । उनके लिये बाजार लगा था ।
(क्रमशः)

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