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स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - श्रीसुन्दर ग्रंथावली
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान,
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*= ज्ञानसमुद्र ग्रन्थ ~ तृतीय उल्लास =*
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*(चामर) गीता*
*यह ॠसिनि उक्त सुनाइयौं,*
*इहिं भाँति प्राणायाम ।*
*सद्गुरु कृपातें पाइये,*
*मन होइ अति बिश्राम ॥*
*अब मतमतांतर कहत हौं,*
*सुनि शिष्य अन्य प्रभाव ।*
*गोरक्ष उक्त बखांनि हौं,*
*तिहिं सुनत उपजय चाव ॥६०॥*
इस पद्धति से प्राणायाम करना ॠषि-मुनियों द्वारा बताया गया है । यह पद्धति किसी सद्गुरु की कृपा से ही प्राप्त होती है । इस प्राणायाम विधि से योगी को चित्तवृति निरोध में बहुत सहायता मिलती है । यह हमने प्राणायाम की सामान्य पद्धति बतायी । अब मतान्तर से कुछ अन्य विधियाँ भी(जो उपयोगी हैं) बताते हैं, ध्यानपूर्वक सुनो । उसमें प्रथम श्रीगोरखनाथजी द्वारा कथित विधि बताता हूँ, जिसे सुनने की योगी लोग उत्कण्ठा रखते हैं ॥६०॥
(क्रमशः)

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