मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

= ज्ञानसमुद्र(च. उ. १-२) =

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🌷🙏🇮🇳 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🇮🇳🙏🌷
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स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - श्रीसुन्दर ग्रंथावली 
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान, 
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*= ज्ञानसमुद्र ग्रन्थ ~ चर्तुथ उल्लास =*
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*शिष्य उवाच ~ चौपाई*
*हे प्रभु बहुत कृपा तुम कीन्हीं ।* 
*ऐसी बुद्धि दया करि दीन्हीं ।* 
*मोकौं योग सिद्धांत सुनायौ ।* 
*जो पूछयौ सो उत्तर पायौ ॥१॥*
(शिष्य कहता है-) प्रभो ! आपने मुझ पर अत्यन्त कृपा की । आपने दया कर के मुझ को ऐसा अनुपम ज्ञान दे दिया । आपने मुझे विस्तार से योग सिद्धांतों का श्रवण करा दिया । जहाँ-जहाँ मुझे कोई शंका-सन्देह हुआ आपने उत्तर देकर उसका निवारण कर दिया ॥१॥
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*अब प्रभु सांख्य सु मोहि सुनावहु ।* 
*मेरे सब संदेह मिटावहु ।* 
*यह गुरुदेव कृपा करि कहिये ।* 
*तुम बिन अवर कहौ कत लहिये ॥२॥*
के स्वामिन् ! अब आप इसी तरह सांख्यशास्त्र का श्रवण करा दीजिये, उसके बारे में भी मेरे जो शंका-सन्देह हों, मिटा दीजिये । हे गुरुदेव ! कृपा कर के यह उपदेश भी मुझको कर ही दीजिये; क्योंकि आप के बिना मुझे कब किसी दूसरे के पास ऐसा सुनहरा मौका मिलेगा ॥२॥
(क्रमशः)

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