रविवार, 10 जुलाई 2016

= सर्वांगयोगप्रदीपिका(प्र.उ. १५/६) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*सर्वांगयोगप्रदीपिका१(ग्रन्थ२) ~ प्रथम उपदेश*
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*केचित् परमहंस संन्यासी ।*
*साखा सूत्र तजी बहु पासी ॥*
*केचित् नित्य जु करहि सनाना ।*
*सायंकाल प्रात मध्याना ॥१५॥*
कुछ संन्यासाश्रम को ही मोक्ष-मार्ग का द्वार बतलाते हैं, और इसी लिये वे शिखा-सूत्र(या वेद के शाखा-सूत्र) त्याग कर मठ आदि के बन्धन में बन्ध जाते हैं । और कुछ आचार्य नित्य तीन बार(प्रात:, मध्यो तथा सायम्) स्नान करने में ही मोक्ष-प्राप्ति मान बैठे ॥१५॥
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*केचित् नियम ब्रत हि बहु धारैं ।*
*चंद्रायन उपवास विचारैं ॥*
*केचित् करैं देव की पूजा ।*
*पाती पुष्प तोरि ह्वै दूजा ॥१६॥*
कुछ आचार्य तरह-तरह के नियम तथा व्रतों के पालन करने में ही मोक्ष पा लेना समझ लेते हैं, और चंद्रायण आदि कृच्छ व्रतों से अपने शरीर को सुखाते रहते हैं । कुछ लोग मन्दिरों में देवता की मूर्ति के सामने फूल पत्तों के द्वारा द्वैतभाव से पूजा करने से ही लक्ष्यपूर्ति मान बैठते हैं ॥१६॥
(क्रमशः)

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