मंगलवार, 12 जुलाई 2016

= सर्वांगयोगप्रदीपिका(प्र.उ. १९/२०) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*सर्वांगयोगप्रदीपिका१(ग्रन्थ२) ~ प्रथम उपदेश*
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*केचित् नास्तिकवाद प्रचंडा ।*
*तेतौ करहिं बहुत पाखंडा ॥*
*केचित् देवी शक्ति मनावै ।*
*जीव हतन करि ताहि च़ढावै ॥१९॥*
कोई प्रचण्ड(घोर) नास्तिकवादी होते हुए नाना प्रकार के पाखण्डों द्वारा त्रिविध दु:खों से छुटकारा पाने की झूठी आशा में जीवन भर जीते हैं । कुछ(शक्ति के पुजारी) लोग शक्ति को मोक्षदात्री मान बैठते हैं, और नाना प्रकार की जीव-हत्या कर उसे बलि चढाते रहते हैं ॥१९॥
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*केचित् बहु बिधि होम कराहीं ।*
*तिल जब घृतहि अग्नि मुख मांहीं ॥*
*केचित् यजन करहिं खलु देवा ।*
*धूप दीप करि ताकी सेवा ॥२०॥*
कुछ लोग मोक्ष का रास्ता बतलाते हैं- तरह-तरह के होम करना । जिसके द्वारा अक्षत, तिल, जौ, घी आदि उपयोगी महर्घ द्रव्य व्यर्थ की अग्नि में जलाते रहते हैं । कुछ आचार्य देवताओं के लिये नाना प्रकार के यज्ञ कराने में परमार्थ समझते हैं और धूप दीप नैवेद्य से उन देवताओं की पूजा-स्तुति में ही समय बिताते रहते हैं ॥२०॥
(क्रमशः)

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