🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*सर्वांगयोगप्रदीपिका१(ग्रन्थ२) ~ प्रथम उपदेश*
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*केचित् शौच अचार हि धर्मा ।*
*संध्या तर्पण अरु खटकर्मा ॥*
*केचित् बर्ण आश्रमाधारी ।*
*ब्रह्मचर्य पालहिं ब्रह्मचारी ॥१३॥*
कुछ आचार्य शुद्धि तथा आचार शास्त्र का सहारा लेकर नित्य के छह कर्मों-सन्ध्या, जप, तर्पण, होम, बलिवैश्वदेव और स्नान को ही मोक्षप्राप्ति का उपाय बतलाते हैं । कुछ वर्णाश्रम धर्म की व्यवस्था के पालन करने मात्र से और कुछ आचार्य ब्रह्मचारी ब्रह्मचर्य-पालन करने मात्र से सिद्धि-प्राप्ति बताते हैं ॥१३॥
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*केचित् गारहस्त बहु भाँती ।*
*पुत्र कलत्र बंधे दिन राती ॥*
*केचित् वानप्रस्थ मत लीनां ।*
*कामिनि सहित गवन बन कीनां ॥१४॥*
कुछ आचार्य स्त्री-पुत्रादि के मोह में बँधे रहकर गृहस्थ धर्म का पालन करने से ही मोक्ष प्राप्रि बतलाते हैं । और कुछ वानप्रस्थाश्रम की रीति से तत्त्व-ज्ञान की प्राप्ति होती बतलाते हैं । इसलिये वे अपनी स्त्री सहित जीवनभर वन में पडे रहते हैं ॥१४॥
(क्रमशः)

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