मंगलवार, 9 अगस्त 2016

= सर्वंगयोगप्रदीपिका (द्वि.उ. ९/१०) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*सर्वांगयोगप्रदीपिका१ (ग्रंथ२)*
*भक्तियोग नामक द्वितीय उपदेश*
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*सहज सुखासन बैठे स्वामी ।*
*आगै सेवक करै गुलामी ।* 
*संजम उदक सनान करावै ।*
*प्रेम प्रीति के पुष्प च़ढावै ॥९॥*
तथा(उस शून्य मन्दिर में) मानस कल्पना से ही सिंहासन पर तेजपुंज भगवान् को बैठाकर वहाँ जिज्ञासु को दास्य भाव से वन्दना करनी चाहिये । मानस संयम रूपी जल से स्नान करावै, अपने परम प्रेमरूपी फूल चढावै ॥९॥
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*चित चन्दन लै चरचै अंगा ।*
*ध्यान धूप खेवै ता संगा ।* 
*भोजन भाव घरै लै आगै ।*
*मनसा वाचा कछू न मांगै ॥१०॥*
मनसा कल्पित चन्दन का तिलक लगावें । ध्यान के द्वारा ही उसे धूप-दीप दिखाना चाहिये । और उसके सम्मुख मनसा कल्पित भोग(=भोजन भी) रखना चाहिये । परन्तु साधक को इस पूजा के प्रतिपल में भगवान् से अपने लिये कुछ भी माँग नहीं करनी चाहिये ॥१०॥
(क्रमशः)

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