शुक्रवार, 2 सितंबर 2016

= सर्वंगयोगप्रदीपिका (तृ.उ.७/८) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*सर्वांगयोगप्रदीपिका (ग्रंथ२)*
**अथ हठयोग नामक - तृतीय उपदेश**
*साधना में पथ्यापथ्य -* 
*देह कष्ट पुनि करै न सोई ।*
*प्रात सनान उपासन कोई ।* 
*गोहूँ शालि सु करै अहारा ।*
*साठी चांवर अधिक पियारा ॥७॥*
दूसरी तरफ, योगी को यह भी ध्यान रखना चाहिये कि देह को कष्ट देकर कोई कार्य न करे । यदि बहुत सबेरे उठकर स्नान करने में(शुद्धि में) या उपासना करने में देह कष्ट मानता हो तो उसे थोड़े विलम्ब से प्रारम्भ करना चाहिये । भोजन में गेहूँ, चावल यदि सात्त्विक अन्न का ही प्रयोग करना चाहिये । साठी चावल यदि मिले तो उसका ही अधिकतर प्रयोग करे ॥७॥ 
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*खीर खांड घृत मधु पुनि सांनि ।*
*सूंठि पटोल निर्मल अति पांनी ।* 
*यहु भोजन सु करै हठ योगी ।*
*दिन दिन काया होइ निरोगी ॥८॥*
दूध, घी में शहद या शक्कर मिलाकर प्रयोग करे । और जल को सूंठ और पटोलपात्र डालकर गरम करके ठण्डा होने पर उपयोग में लेना चाहिये । यदि हठयोग साधनाभ्यासी साधक ऊपर बतायी वस्तुओं का ही भोजन में उपयोग करे तो उसका शरीर दिन-प्रतिदिन नीरोग एवं स्वस्थ होता जाता है ॥८॥
(क्रमशः)

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