रविवार, 19 फ़रवरी 2017

= निष्कामी पतिव्रता का अंग =(८/१०-२)


卐 सत्यराम सा 卐
**श्री दादू अनुभव वाणी** टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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**= निष्कामी पतिव्रता का अँग ८ =**
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तुम्हीं आमची जीवनि, तुम्हीं आमचा जप । 
तुम्हीं आमचा साधन, तुम्हीं आमचा तप ॥ १० ॥ 
आप ही हमारी साधन वृत्तान्त रूप जीवनी वो जीवन शक्ति हैं । आप ही हमारे मूल मँत्र का चिन्तन रूप जप हैं । आप ही हमारे स्वरूप ज्ञान के हेतु अंतरँग साधन हैं और आप ही तितिक्षादि बहिरँग साधन रूप तप हैं । 
तुम्हीं आमचा शील, तुम्हीं आमचा सँतोष ।
तुम्हीं आमची मुक्ति, तुम्हीं आमचा मोष१ ॥ ११ ॥
आप ही हमारा ब्रह्मचर्य रूप शील व्रत हैं । आप ही हमारा यथा लाभ सँतोष हैं । आप ही हमारी सालोक्य, सामीप्य, सारूप्य और सायुज्य, चतुर्विधि मुक्तियाँ हैं और आप ही हमारी ब्रह्म प्राप्ति रूप कैवल्य मोक्ष१ हैं । 
तुम्हीं आमचा शिव, तुम्हीं आमची शक्ति ।
तुम्हीं आमचा आगम, तुम्हीं आमची उक्ति ॥ १२ ॥ 
आप ही हमारे कैलाशवासी शिव हैं । आप ही हमारी दानव - दल - निकंदनी शक्ति हैं । आप ही हमारे शिव तथा शक्ति द्वारा कहे हुये आगम रूप शास्त्र हैं । आप ही हमारे विचित्र अनुभव - सँपन्न कथन हैं ।
(क्रमशः)

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