गुरुवार, 23 नवंबर 2017

= साधु का अँग =(१५/७९-८१)

#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
*श्री दादू अनुभव वाणी* 
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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*साधु का अँग १५*
घर वन माँहीं राखिये, दीपक जलता होइ । 
दादू प्राण पतँग सब, जाइ मिलैं सब कोइ ॥७९॥ 
ज्ञान - दीपक प्रज्वलित हो जाने पर शरीर को चाहे घर में रक्खो या वन में, जिज्ञासु प्राणी रूपी पतँग तो सब वहां ही पहुंच जायेंगे ।
घर वन माँहीं राखिये, दीपक प्रकट प्रकास । 
दादू प्राण पतँग सब, आइ मिलैं उस पास ॥८०॥ 
हृदय में ज्ञान - दीपक का प्रकाश प्रकट हो जाने पर शरीर को घर में रक्खो वो वन में, जिज्ञासु प्राणी रूपी पतँग तो सब अपने आप उस ज्ञानी के पास आकर ब्रह्म - प्रकाश में लय हो जाते हैं । 
घर वन माँहीं राखिये, दीपक ज्योति सहेत । 
दादू प्राण पतँग सब, आइ मिलैं उस हेत ॥८१॥ 
ज्ञान - दीपक की ज्योति सहित शरीर को घर में रखोवो वन में, जिज्ञासु प्राणी - पतँग तो सब उस ज्योति के लिए वहां ही आकर ब्रह्म प्रकाश में मिल जायेंगे ।
(क्रमशः)

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