बुधवार, 15 नवंबर 2017

= ब्रह्मस्तोत्र अष्टक(ग्रन्थ २३-३) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान,
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*= ब्रह्मस्तोत्र अष्टक(ग्रन्थ २३) =*
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*अडोलं अतोलं अमोलं अमानं ।* 
*अदेहं अछेहं अनेहं निधानं ।* 
*अजापं अथापं अपापं अतापं ।*
*नमस्ते नमस्ते नमस्ते अमायं ॥३॥*
आप स्थिर हैं, आप अनुपमेय हैं, आपको किसी भी मूल्य से आंका नहीं जा सकता, आपको आपको किसी भी प्रकार मापा नहीं जा सकता । आप अशरीरी(नाम-रूप से रहित) हैं, आप अदेह(अविनाशी) हैं, आप निष्पक्ष हैं, निष्काम हैं, अतः किसी के प्रति विशेष स्नेह नहीं रखते, आप समग्र जगत् के आधार(प्रतिष्ठा) हैं । आपका इदन्त्या या इत्थन्तया गुणगान नहीं हो सकता, आप एकस्थानीय न होकर सर्वव्यापक हैं, आप निष्पाप(निष्कलंक) हैं, आप सुख-दुःख आदि क्लेशों के ताप से रहित हैं, अतः हे अप्रमेय !(असीम) आपको बार-बार प्रणाम है ॥३॥ 
(क्रमशः)

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