मंगलवार, 14 नवंबर 2017

= १६३ =

卐 सत्यराम सा 卐
*जे हम छाड़ैं राम को, तो कौन गहेगा ?*
*दादू हम नहिं उच्चरैं, तो कौन कहेगा ?*
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साभार ~ Krishnacharandas Aurobindo
राम कृष्ण हरि म्हणाव हाय नका म्हणु. आपण भारतीय आहोत. राम राम,जय हरि... ही आपली अभिवादनाची पध्दती आहे.... अन् त्याच्या(नित्य जीवनात धर्मानुसरणाने) अनुसरणाने च आपले व ईतरांचे कल्याण होऊ शकते...!! !
हाय...गुड मॉर्निंग...गुड नाईट...गुड डे...नाईस डे...अशा अभिवादनाची इंग्रजी पध्दति ने आपल्या मायला आपण म्लेंछापुढे तुच्छ करतो. आपल्या हिंदुत्वावर अन् त्यात मराठी भाषेबद्दल अभिमान बाळगा..! 
माझा मराठाची बोल कवतुके। अमृताते पैजा जिंके।
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भगवानके नाम से एक दूसरे के अंदर एक ही परमात्माका भाव का स्मरण कराने की हमारी अभिवादन शैली सारे संसारमें सर्व श्रेष्ठ तथा संसार का कल्याणहेतु हैं... उसे ही अपनाओ। 
चलते-फिरते, उठते-बैठते, खाते-पीते, सोते-जागते... सब समय अपने तथा इस सुँदर विश्व के निर्माता को या विश्वरुप श्रीहरि को स्मरण में रख उनके लिये कामना रहित कर्म कर समर्पण करना ही हिंदुत्व है... ऐसे तेजस्वी हिंदू बनो तो बच पाओगे भविष्य में होनेवाले महाविनाश से। तभी भगवान तुम्हें बचायेंगे। संस्कारहीनों को तो मरना पडेगा...
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..This is the hour of God.... clinse thy soul of all hypocrisy and self-flattering so that thou mayst look into thy soul and hear which summons... This is the hour of most unexpected. 
क्योंकि ये भागवत-मुहुर्त है... अनपेक्षित का समय... अपनी आत्मा को जगाने का समय...!!!

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