🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान,
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*= अजब ख्याल अष्टक(ग्रन्थ २५) =*
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*= गीतक =*
*अल्लाह खुदाइ करीम कादिर४,*
*पाक प्रवार्दिगार है ।*
*सुबिहान५ तूं सत्तार६ साहिब,*
*साफ़ सिरजनहार है ॥*
*मुस्ताक७ तेरे नांव् ऊपर,*
*खूब खूबां लाल है ।*
*यौं कहत सुन्दर कब्जदुन्दर,*
*अजब ऐसा ख्याल है ॥४॥*
(४. कादिर = शक्तिधारी)(५. सुविहान = सुबहान = पाक, पवित्र)
(६. सत्तार = पर्दापोशी करनेवाला)(७. मुश्ताक = इच्छुक)
वह राम, क्योंकि चराचर जगत् में व्याप्त है, दयालु है एकान्ततः शुभ का दाता है, पवित्र(मायारहित) है, जगद्रक्षक है सबको पैदा करने वाला है, अतः इसके नाम पर भक्त को न्यौछावर हो जाना चाहिये; तभी उसे परम तत्व का साक्षात्कार होगा । यह बात सुनने में भले ही आश्चर्यजनक लगे परन्तु बिना मन और इन्द्रिय निग्रह के उस गुह्य तत्व तक नहीं पहुँचा जा सकता है ॥४॥
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*= दोहा =*
*सुन्दर इस औजूद मौं, इश्क लगाई ऊक८ ।*
*आशिक ठंडा होइ तब, आइ मिलै माशूक ॥६॥*
(८. ऊक = जलन, डाह= उग्र पिपासा)
महात्मा कहते हैं - इस जीवात्मा को उस परमात्मा से मिलने की ललक है । इसे तभी शान्ति मिलेगी जब इसका उस(परमात्मा) से मेल हो जायगा ॥६॥
(क्रमशः)

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